Sunday, July 11, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 48

जग्गू ने राहुल के सवाल का कोई जवाब नहीं दिया और थाली में रखी एक एक चीज़ उठाकर सूंघने लगा। फिर जैसे ही उसने दाल की कटोरी उठायी उसके नीचे से कागज का एक छोटा सा पुर्जा निकलकर हवा में उड़ने लगा।
‘‘वह देखो, कटोरी के नीचे चिड़िया कैसे आ गयी। उसे पकड़ो।’’ राहुल ने कागज का टुकड़ा उठा लिया। जग्गू ने भोजन की थाली नीचे रखी और पुर्जा पढ़ने लगा। उसके मस्तिष्क की सिलवटें बता रही थीं कि इस पुर्जे में कोई विशेष बात लिखी है।

‘‘क्या लिखा है इसमें?’’ राहुल ने पूछा।
‘‘यह तुम्हारी आत्महत्या का फरमान है।’’ जग्गू ने बताया।
‘‘क्या मतलब?’’

‘‘देखो, इसमें लिखा है कि तुम चूंकि खोका के मुखिया हो और तुम नहीं चाहते कि पुलिस खोका संगठन के बारे में तुम्हारी जबान खुलवाए अत: तुम पोटेशियम साईनाइड खाकर आत्महत्या कर रहे हो। यानि यह कि तुम्हारे खाने में पोटेशियम सायनाइड मिला हुआ है। तुम अभी इस भोजन को करते और ऊपर पहुंच जाते। दुनिया यही समझती कि तुम ने आत्महत्या कर ली।’’

‘‘ओह। मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि यह भी हो सकता है। मैं तुम्हारा सदैव आभारी रहूंगा। मैं इस खाने को फेंक देता हूं। इस समय भूखा ही रह लूंगा।’’

जग्गू ने राहुल की पीठ थपथपायी और बोला, ‘‘अभी तुम्हें बहुत कुछ सीखना है। मेरे शागिर्द बन जाओ, लाभ में रहोगे। पहली बात तो ये है कि पूरे भोजन में जहर हो ही नहीं सकता। क्योंकि इस प्रकार तुम्हारी मृत्यु के बाद पुलिस जब भोजन का विश्लेषण करती तो पता लग जाता कि तुमने जहर खाया नहीं बल्कि तुम्हें जहर दिया गया है। अत: जहर किसी एक आइटम में मिलाया गया है। ऐसा आईटम जो तुम एक बार में पूरे का पूरा चट कर सको। और वह आईटम अण्डा ही हो सकता है। मैं अभी इसे टेस्ट कर लेता हूं।’’ जग्गू ने अण्डे का थोड़ा सा भाग लेकर एक कोने की ओर फेंका जहाँ एक चूहा बिल से झांक रहा था। शायद वह खाने की गन्ध् पाकर वहाँ आ गया था। वह कुछ देर अण्डे के उस भाग को देखता रहा फिर आगे बढ़कर उसे धीरे धीरे खाने लगा। अभी उसने थोड़ा सा ही खाया होगा कि वह वहीं लम्बा हो गया। जग्गू उसके पास पहुंचा। अब चूहा पूरी तरह निश्चल पड़ा था।

‘‘यह देखो चूहा मर गया। यानि मेरा अनुमान सही सिद्ध हुआ।’’
‘‘हे भगवान। मैं तो बाल बाल बच गया। वरना मरता भी और बदनाम भी होता। तुम मेरे लिये भगवान के दूत बनकर आये हो।’’ राहुल के चेहरे पर हवाईयां उड़ रही थीं।

‘‘भगवान का दूत अच्छाईयों का पुतला होता है। मेरी तरह बुरा आदमी नहीं। मुझे मनुष्य ही रहने दो। हाँ--हाँ उसे न छुओ।’’ राहुल को चूहे की ओर हाथ बढ़ाते देखकर उसने टोका, ‘‘यह मेरे काम आयेगा।’’
‘‘क्या? यह चूहा किस काम आयेगा तुम्हारे?’’ राहुल ने आश्चर्य से कहा।
‘‘यदि मनुष्य में अक्ल हो तो वह मरे हुए चूहे से भी अपना काम निकाल सकता है। अभी देखते रहो। यह चूहा हमारी रिहाई में किस प्रकार मदद करता है।’’ जग्गू उठा और कोठरी के दरवाजे पर जाकर खड़ा हो गया।
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