Wednesday, July 7, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 47

‘‘यह ठीक रहेगा। मैं आज ही से उसका पीछा करना शुरू कर देता हूं। किन्तु समस्या ये है कि जब मैं उसका पीछा करूंगा तो वह मुझे तुरंत पहचान जायेगी। और फिर मैं लल्लू को पहचानूंगा कैसे?’’
‘‘अरे मेरे होते हुए तुम्हें किस बात की चिन्ता! मैं करूंगा उसका पीछा तुम्हारी तरफ से। मैं पकड़ूंगा उन्हें रंगे हाथों।’’

‘‘तुम! किन्तु तुम कैसे पकड़ोगे उन्हें। तुम तो यहां बन्द हो।’’
‘‘अब इतना तो तुम्हें करना ही पड़ेगा। मैं एक तरकीब बताता हूं। तुम चुपके से इस कोठरी का ताला खोल दो। मैं जाकर तुम्हारा काम कर दूंगा फिर वापस आकर कोठरी मैं बैठ जाऊंगा और तुम ताला लगा देना।’’
‘‘और अगर तुम वापस न आये तो? मेरी नौकरी नहीं चली जायेगी?’’

‘‘तुम किसी को बताना ही नहीं कि तुमने मुझे आजाद किया है। तुम कह देना कि कैदी फरार हो गये।’’ जग्गू धीरे धीरे अमिताभ बच्चन को अपने जाल में फंसा रहा था।
‘‘यह सब मैं नहीं करूंगा। मैं स्वयं रामकली को देख लूंगा। अब तुम चुप होकर बैठो। ज्यादा बक बक की तो यहीं लाठी दिखाना शुरू कर दूंगा।’’ पहरेदार ने डपट कर कहा, और अपने स्थान पर जाकर खड़ा हो गया।

‘‘यह तो गड़बड़ हो गयी। उसने हमारी बात मानने से इंकार कर दिया।’’ जग्गू ने कहा।
‘‘तुम भी तो हद से आगे बढ़ गये थे।’’ राहुल ने हंसते हुए कहा।
‘‘खैर यहां से फरार तो होना ही है। अब कोई और तरकीब लगानी पड़ेगी।’’ जग्गू ने कहा। 

उसी समय एक सिपाही इन दोनों के लिये दो थालियों में भोजन लेकर आया। अमिताभ बच्चन ने आगे बढ़कर ताला खोला और उसने राहुल तथा जग्गू के हाथों में एक एक थाली पकड़ा दी। पहरेदार ने फिर ताला बन्द किया और वह सिपाही वापस लौट गया।

‘‘आज मैं दो अनहोनियां एक साथ देख रहा हूं।’’ जग्गू बोला।
‘‘वह क्या?’’
‘‘हमारी आसपास की कोठरियों में भी तो कैदी हैं। फिर केवल हमारे लिये ही क्यों भोजन आया? होना तो यह चाहिए था कि सबको एक साथ एक कमरे में भोजन करा दिया जाता जैसा कि यहाँ का नियम है। दूसरी अनहोनी यह है कि हमारी प्लेटों में एक एक अण्डा भी है उबला हुआ। भला कैदियों को अण्डा कहां दिया जाता है।’’ जग्गू ने कहा। अभी तक उन लोगों ने भोजन आरम्भ नहीं किया था।

‘‘हो सकता है पुलिस हम पर मेहरबान हो गयी हो। उन्होंने सोच लिया हो कि मैं निर्दोष हूं।’’
‘‘पुलिस इतनी आसानी से मेहरबान नहीं हो सकती। और फिर यह जेल है। मुझे लगता है कि इस भोजन में कुछ गड़बड़ है।’’ जग्गू ने राहुल की थाली अपनी हाथ में ले ली।
‘‘कैसी गड़बड़?’’
 

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