Saturday, July 3, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 46

‘‘अरे तो जल्दी बताओ न। क्यों परेशान कर रहे हो!’’
‘‘ऐसे नहीं बताऊंगा। पहले तुम मुझे और मेरे दोस्त को एक एक सिगरेट पिलाओ।’’
‘‘ठीक है, बाबा ठीक है। मैं अभी तुम्हारे लिये सिगरेट लाता हूं। तुम लोग इतनी देर में कहीं चले न जाना।’’ वह बाहर जाने लगा।

‘‘अरे हम लोग कहाँ जायेंगे। देख नहीं रहे हो। इस कोठरी में बाहर से ताला लगा है।’’ जग्गू बोला।
‘‘ओह! ये तो मैं भूल ही गया था कि तुम लोग कैदी हो।’’ वह मुड़ा और सिगरेट लेने के लिये बाहर चला गया।
‘‘देखा तुमने। इस प्रकार मैं इन लोगों से काम निकालता हूं।’’ जग्गू ने चुटकी बजाते हुए कहा।
‘‘किन्तु तुम उसे कौन सी राज की बात बताओगे?’’
‘‘अरे, वह तो यूं ही हवाई होगी। अभी तुम खुद ही देख लोगे।’’

कुछ देर बाद वह पहरेदार सिगरेट का पूरा पैकेट उठा लाया।
‘‘लो ये सिगरेट। इस समय यदि मेरी बात न होती तो मैं तुम्हें यहीं डण्डे से पीट डालता।’’
‘‘बहुत बहुत ध्न्यावाद मेरे दोस्त। यह सिगरेट तो बहुत मंहगी है। तुमने हमारे लिये बहुत पैसे खर्च कर दिये।’’ जग्गू ने सिगरेट सुलगाकर एक राहुल को दी और दूसरी स्वयं अपने मुंह से लगा ली।

‘‘अरे कैसे पैसे। वह साला दुकानदार सिपाही अमिताभ बच्चन से पैसे लेने की जुर्रत करेगा। मार मारकर बन्द कर दूंगा। जीवन भर जेल में सड़ता रहेगा।’’
‘‘खैर मुझे क्या तुम लोगों के झगड़ों से। यह तुम्हारा और दुकानदार का आपसी मामला है। मैं तो तुम्हें वह राज की बात बताने जा रहा हूं।’’ जग्गू ने सिगरेट का बाकी पैकेट कोने में पड़े टाट के नीचे छुपाते हुए कहा, ‘‘बात ये है कि मेरा एक हमपेशा है लल्लू। काफी लंबा तगड़ा स्मार्ट। वह अपने बालों का स्टाइल बदल बदल कर किसी भी फिल्मी हीरो के समान हो सकता है।’’

‘‘यह सब तुम मुझे क्यों बता रहे हो? मुझे क्या मतलब तुम्हारे लल्लू से?’’
‘‘तुमसे नहीं मतलब तो तुम्हारी पत्नी से तो मतलब है। बात यह है कि लल्लू भी कबाड़ी बाजार में रहता है और तुम्हारी पत्नी भी। तुम तो दिन भर यहाँ ड्‌यूटी देते रहते हो और वहाँ तुम्हारी पत्नी लल्लू के साथ ड्‌यूटी देने पर विचार कर रही है।’’ जग्गू ने धीरे धीरे अमिताभ बच्चन को सारी बातें समझाईं।

‘‘क--क्या कह रहे हो तुम। य--ये नहीं हो सकता।’’ उसने हकलाते हुए कहा।
‘‘यही हुआ है। मैं स्वयं चलकर तुम्हें वह दृश्य दिखा सकता हूं जब तुम्हारी पत्नी लल्लू का हाथ अपने हाथों में लिये कह रही थी, मेरे पिये मैं अपने पतिदेव से छुपकर तुमसे मिलने आयी हूं। तुम मुझे अक्षय कुमार की नई पिक्चर दिखा लाओ न।’’

‘‘म--मैं उसका खून कर दूंगा। उसकी यह हिम्मत कि वह अक्षय कुमार की फिल्म देखने जाये बिना मेरी आज्ञा के। अभी जाकर पूछता हूं उससे।’’ क्रोध् के कारण उसका चेहरा आँखों सहित लाल हो गया था, मुंह से झाग निकने लगा था। 
‘‘अरे न--न। ऐसे नहीं। इस प्रकार तो वह साफ मुकर जायेगी। तुम्हें चाहिए कि उसकी गतिविधियों पर दृष्टि रखो और जहाँ उसे लल्लू के साथ देखो, रंगे हाथों पकड़ लो।’’

1 comment:

Udan Tashtari said...

अक्षय कुमार की पिक्चर के लिए इत्ता रिस्क!! ओह नो!!