Tuesday, June 29, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 45

‘‘अरे भई दोस्त---अ--क्या नाम है तुम्हारा?’’ जग्गू ने बत्तीसों दाँत दिखाते हुए पूछा।
‘‘अमिताभ बच्चन। किन्तु तुमसे क्या मतलब?’’ उसने डपट कर पूछा।
‘‘अरे वाह। यह तो एकदम फिल्मी नाम है। क्या पत्नी का नाम भी फिल्मी है?’’

‘‘अरे नहीं। वह तो रामकली है।’’ अपनी तारीफ पर वह खुश हो गया था।
‘‘यदि पत्नी फिल्मी नहीं है तब तो अवश्य तुम्हारे मुहल्ले में कोई पिक्चर हाल होगा।’’
‘‘हाँ है तो मैना हाल। किन्तु तुम यह सब क्यों पूछ रहे हो?’’

‘‘अरे कुछ मतलब है तभी तो पूछ रहा हूं। वैसे अमिताभ बच्चन जी आपकी मम्मी ने आपकी लम्बाई देखकर ही यह नाम रखा होगा। क्या आप बचपन ही से इतने लंबे थे?’’
‘‘पता नहीं। मुझे अपने बचपन की बातें याद नहीं।’’

‘‘कोई बात नहीं। कोई बात नहीं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। वैसे दोस्त क्या तुम्हारे पास सिगरेट होगी?’’
‘‘नहीं। बीड़ी है। किन्तु मैं तुम्हें क्यों देने लगा?’’
‘‘न दो। मैं तुम्हें तब भी वह बात बता दूंगा।’’
‘‘कौन सी बात?’’ वह सलाखों के पास आ गया।

‘‘बहुत राज की बात है और तुम्ही से सम्बंधित है।’’
‘‘तो फिर जल्दी बताओ क्या बात है।’’ वह उत्सुकता से बोला।
‘‘यह बात तुम्हारी पत्नी के बारे में है।’’

‘‘क्या हुआ मेरी पत्नी को?’’ वह घबरा कर बोला, ‘‘किन्तु तुम मेरी पत्नी को क्या जानो?’’
‘‘मैं तो बहुत कुछ जानता हूं। मैं तो यह भी बता सकता हूं कि तुम इस जेल के पहरेदारों में सबसे अधिक बुद्धिमान हो किन्तु कोई तुम्हारी बुद्धिमता को नहीं मानता। वरना अब तक तुम हेड पहरेदार होते।’’
‘‘यह बात तो तुम सही कह रहे हो। किन्तु पहले तुम यह बताओ कि तुम मेरी पत्नी को कैसे जानते हो?’’

‘‘मैं तो यह भी जानता हूं कि तुम्हारी पत्नी का नाम रामकली है और तुम कबाड़ी बाजार में रहते हो।’’
‘‘हांयें! यह सब तुम कैसे जान गये? तुम्हें कैसे पता कि मेरी पत्नी का नाम रामकली है और मैं कबाड़ी बाजार में रहता हूं।’’ अमिताभ बच्चन जी इतनी देर में भूल चुके थे कि वे स्वयं अपनी पत्नी का नाम बता चुके हैं और मैना नामक सिनेमाहाल कबाड़ी बाजार में है।

‘‘तो बस तुम यह तो समझ ही गये होगे कि जब मैंने तुम्हारी पत्नी का नाम और तुम्हारे घर का पता सही बता दिया तो मैं और बातें जो बताऊंगा वे भी सही होंगी।’’ जग्गू ने राहुल की तरफ देखकर एक आँख दबाई।

1 comment:

PD said...

भाई, अबकी कुछ ज्यादे नाटक हो गया.. ही ही ही... :D