Wednesday, June 16, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 40

‘‘अगर राहुल की आत्महत्या के बाद भी पुलिस उसे खोका का मुखिया मानने पर तैयार न हुई तो तुम्हारा अगला कदम क्या होगा?’’
‘‘इसके बारे में भी पूरी तैयारी है।’’ खोका संगठन के व्यक्ति ने कहा, ‘‘हमने हर पहलू पर गौर कर लिया है, तब यह प्लानिंग की है।’’
‘‘जब तुम्हारे संगठन ने पहली दो हत्याएं अकेले की थीं तो इस बार हमारी सहायता क्यों ली गयी?’’

‘‘लगता है तुम अपनी टीम में सबसे निचले दर्जे के कार्यकर्ता हो और तुम्हारे बॉस ने तुम्हें कुछ नहीं बताया है। हो सकता है यह बताना तुम्हारे बॉस ने उचित नहीं समझा हो। फिर मैं यह बात कैसे बता सकता हूं? मैं केवल इतना बता सकता हूं कि हम दोनों मिलकर एक ऐसा कार्य कर रहे हैं जिसके पूरा होने में दोनों का हित है।’’ उस व्यक्ति ने उठते हुए कहा, ‘‘मेरा विचार है कि अब तुम अपनी शंकाओं का समाधान अपने बॉस के द्वारा ही करो।’’

‘‘किन्तु अब तुम कहाँ जा रहे हो? तुमने उस बारे में तो कोई बात ही नहीं की जिसके लिये तुम ने मुझे यहाँ बुलाया था।
‘‘वह बात हो चुकी। राहुल के लिये वह पुर्जा तुम्हें ही लिखना है और उसे तथा पोटेशियम साईनायड को राहुल के मुंह तक पहुंचाने की जिम्मेदारी तुम्हारी है।
‘‘मैं पुर्जा तो लिख दूंगा किन्तु वहाँ तक इसे पहुंचाना मेरे लिये संभव नहीं है।’’

‘‘ठीक है। वह काम मैं कर लूंगा। तुम पुर्जा लिखकर दे देना और यह ध्यान रखना कि कागज पर तुम्हारी उंगलियों के निशान न बनने पायें।’’
‘‘इस बारे में तुम निश्चिन्त रहो। इस काम का मैं माहिर हूं।’’ तान्त्रिक बोला। और वह व्यक्ति उठकर बाहर आ गया।

कुछ देर में उसकी कार राजनगर की एक व्यस्त सड़क पर दौड़ रही थी। इस समय शाम का अँधेरा फैलने लगा था। फिर उसकी कार एक बँगले के कम्पाउण्ड में दाखिल हुई। यह पूरा बंगला सन्नाटे में डूबा हुआ था और यह व्यक्ति शायद उस बंगले में अकेला रहता था। क्योंकि कोई नौकर भी नहीं दिखाई पड़ रहा था।
कार को गैरेज में खड़ी करने के बाद वह एक कमरे में प्रविष्ट हुआ और फोन उठाकर कोई नंबर डायल करने लगा।

नंबर मिल जाने के बाद वह बोला, ‘‘हलो शोरी -- मैं तुम्हारा बॉस बोल रहा हूं। मैं दो दिनों के लिये आस्ट्रेलिया से वापस आ गया हूं। और कल मुझे वापस जाना है।--- क्या कहा, दीनानाथ की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी? दु:ख हुआ यह सुनकर।-- मैंने उसे राहुल से टकराने के लिये इसलिये कहा था कि राहुल द्वारा एक वस्तु उसके पास पहुंचनी थी किन्तु वह वस्तु पहुंच नहीं पायी। --वह वस्तु क्या थी यह एक सीक्रेट है। --तुम निश्चिन्त रहो पुलिस तुम्हें कुछ नहीं कहेगी। बस तुम किसी से यह मत कहना कि राहुल से टकराने का आदेश तुमने दिया था। तुम मेरा नाम ले देना, मैं सब सँभाल लूंगा। अभी किसी को पता नहीं चलना चाहिए कि मैं आस्ट्रेलिया से वापस आ गया हूं। वैसे भी कल मैं वापस जा रहा हूं।’’ उसने रिसीवर रखा और कुछ सोचने लगा। उसके शरीर पर अभी भी वही वस्त्र थे।
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1 comment:

seema gupta said...

तुम पुर्जा लिखकर दे देना और यह ध्यान रखना कि कागज पर तुम्हारी उंगलियों के निशान न बनने पायें।’’
रोचक आगे का इंतजार
regards