Sunday, June 13, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 39

कमरा वही पुराना था जहाँ इससे पहले भी वे दोनों कई बार मिल चुके थे। अर्थात खोका संगठन का वह व्यक्ति जो काला चश्माधारी था और लंबी कैप में था और शायद यह उसका स्थायी हुलिया था। जबकि दूसरा भारी भरकम व्यक्ति अर्थात तान्त्रिक था।
‘‘राहुल तो गिरफ्तार हो गया। अर्थात हमारी पहली सफलता।’’ खोका संगठन के व्यक्ति ने कहा।

‘‘पहली क्यों? क्या गृहमन्त्री की हत्या हमारी सफलता नहीं है? या फिर हमारे एक छोटे कार्यकर्ता का भी पुलिस के हाथ न लग पाना भी तो हमारी सफलता है।’’ तान्त्रिक बोला।
‘‘मैंने थोड़ा गलत कहा। वास्तव में मुझे यह कहना चाहिए था कि पुलिस को गलत दिशा में मोड़ने में हमारी यह पहली सफलता है।’’

‘‘हम लोगों से एक गलती हुई। यदि हम गृहमन्त्री की हत्या वाली सीडी गायब करके उसकी जगह पर दूसरी सीडी रख देते तो पुलिस शायद राजनगर तक भी न पहुंच पाती। वहीं दिल्ली में ही सर टकराती रहती।’’ तान्त्रिक ने कहा।
‘‘यह गलती नहीं थी। सीडी को वहीं छोड़ने के कई कारण थे। एक तो यह कि सीडी को वहाँ से हटाने में गलतियां हो सकती थीं। हो सकता है हटाने वाले के उंगलियों के निशान वहाँ छूट जाते या कोई और बात हो जाती। दूसरे उस सीडी में इस प्रकार का प्रोग्राम था जो एक बार काम करने के बाद स्वयं मिट जाता। यह पुलिस का सौभाग्य था जो उन्होंने उस प्रोग्राम को फिर से प्राप्त कर लिया। वैसे यह प्लानिंग तुम्हारे बॉस की थी। तुम चाहो तो उससे यह बात मालूम कर सकते हो।’’

‘‘राहुल को जेल तो भेज दिया गया। और अब वह मकान हमारे लिये उपयोगहीन हो गया है। पुलिस अब भी शक कर रही है कि वह असली अपराधी नहीं हो सकता।’’

‘‘उसका यह शक जल्द ही मिट जायेगा। जब राहुल जेल में आत्महत्या कर लेगा। उसके पास से कागज मिलेगा जिस पर लिखा होगा, ‘मैं खोका संगठन का मुखिया हूं। मेरे लिये यह अपमान असहनीय है कि मैं पुलिस के हाथों पड़कर जेल भेज दिया जाऊं। क्योंकि आजतक मेरे संगठन का कोई व्यक्ति पुलिस के हाथ नहीं लगा। अत: मैं आत्महत्या कर रहा हूं।’ इस प्रकार पुलिस को यह यकीन हो जायेगा कि खोका संगठन का मुखिया मर चुका है और वह इस संगठन की ओर से निश्चिन्त हो जायेगी। क्योंकि मुखिया की अनुपस्थिति में कोई संगठन अधिक दिन नहीं रह सकता।’’

‘‘इतनी प्लानिंग तुम्हारे पहले दो मर्डरों में तो हुई नहीं थी। फिर इस बार क्या बात है?’’ तान्त्रिक ने पूछा।
‘‘इस बार कुछ कारण ऐसे उत्पन्न हो गये कि इतनी प्लानिंग करनी पड़ रही है। एक तो यह कि इस बार यह केस सी-बी-आई- के एक कर्मठ अफसर को दे दिया गया। यह तीसरा मर्डर है अत: पुलिस पूरी तरह झल्लाई हुई है अत: उसकी झल्लाहट को दूसरा रुख देना जरूरी है। और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पहली बार खोका ने किसी दूसरे से अनुबंध् किया है अत: अपने साथ साथ उसे भी बचाने के लिये यह पापड़ बेलने पड़ रहे हैं।’’

4 comments:

Arvind Mishra said...

अब पूरी हो जाय तो इकट्ठे पढ़ लेगें !

zeashan zaidi said...

अरविन्द जी, अभी तो आधी हुई है.

Jandunia said...

महत्वपूर्ण जानकारी दी है आपने। इस पोस्ट के लिए साधुवाद

seema gupta said...

बेहद रोचक है आगे देखे की क्या होता है.....

regards