Friday, June 11, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 38

इं-त्यागी इस समय बी-सी-ओ- कंपनी के स्थानीय मैनेजर शोरी के साथ बैठा हुआ था।
‘‘मि0’शोरी, आपकी कंपनी के एक कार्यकर्ता दीनानाथ की एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गयी है।’’ उसने शोरी की आँखों में देखते हुए कहा। जिसमें यह खबर सुनकर चौंकने के भाव आ गये थे फिर यह भाव बदलकर दु:ख दर्शाने वाले बन गये।

‘‘ओह! यह कब हुआ मैं आश्चर्य में था कि कभी छुट्‌टी न लेने वाले दीनानाथ जी आज क्यों नहीं आये। मुझे बहुत अफसोस हुआ यह सुनकर।’’
‘‘यह दुर्घटना पुलिस की दृष्टि में हत्या भी हो सकती है।’’ इं-त्यागी फिर बोला।
‘‘हत्या? लेकिन क्यों? दीनानाथ तो एक सीधा सादा कार्यकर्ता था। मेरे विचार में तो उसकी किसी से दुश्मनी नहीं थी।’’

‘‘यही सीधापन उसकी मृत्यु का कारण बना है। उसने धमकी दी होगी कि वह असलियत खोल देगा। उसे एक निर्दोष का फंसना अच्छा नहीं लगा होगा। अपराधियों ने उसका मुंह बन्द करने के लिये एक्सीडेंट द्वारा उसकी हत्या कर दी।’’
‘‘मैं समझा नहीं। कैसी धमकी? कैसी असलियत?’’ शोरी के चेहरे पर परेशानी के भाव उत्पन्न हो गये।

‘‘मैं आपको पूरी बात समझाता हूं। साफ्ट प्रो कंपनी ने एक प्रोग्राम बनाकर गिरधारीलाल के पास टेस्टिंग के लिये भेजा। गिरधारीलाल ने उसे अपने एक कार्यकर्ता राहुल के हाथों वापस साफ्ट प्रो तक भेजा। वह प्रोग्राम राहुल के हाथ में एक पैकेट के रूप में था। रास्ते में दीनानाथ उससे टकरा गया और इस टक्कर में उसने राहुल से पैकेट बदल लिया। अब राहुल के पास नकली पैकेट आ गया जिसे उसने साफ्ट प्रो तक पहुंचा दिया और असली पैकेट दीनानाथ के पास पहुंच गया।’’

‘‘ओह। अब मैं समझा। आपके अनुसार बी-सी-ओ- कम्पनी ने यह सब काम करवाया है ओर उसी ने बाद में दीनानाथ की हत्या करा दी।’’
‘‘फिलहाल तो यही समझा जा सकता है। हो सकता है कि पुलिस का शक गलत हो।’’
‘‘किन्तु मैं इस मामले में बिल्कुल निर्दोष हूं। अगर ऐसा काम मेरी कंपनी ने कराया है तो साबित होने पर मैं उसी समय कंपनी से इस्तीफा दे दूंगा।’’

‘‘किन्तु यहां के स्थानीय कार्यकर्ता आप ही के आदेशानुसार काम करते हैं। यदि वे कंपनी का कोई भी कार्य करते हैं तो उसकी जिम्मेदारी आप ही पर मानी जायेगी।’’ इं-त्यागी ने उसके चेहरे पर दृष्टि दौड़ाते हुए कहा।
शोरी कुछ पलों के लिये मौन रहा। उसके चेहर पर चिन्ता की लकीरें स्पष्ट थीं। कुछ देर बाद वह बोला, ‘‘मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है। मुझे दीनानाथ के इस काम के बारे में कुछ खबर नहीं है। पता नहीं वह सब उसने किसके आदेश पर किया, और फिर पता नहीं किसने उसकी हत्या कर दी।’’ वह अपने दोनों हाथ तेजी से मल रहा था।

इं-त्यागी कुछ पलों तक उसका चेहरा देखता रहा, फिर बोला, ‘‘यदि आप निर्दोष हैं तो मैं आपको बचाने का प्रयत्न करूंगा। किन्तु समय पड़ने पर आपको मेरा सहयोग करना पड़ेगा।’’
‘‘मैं तैयार हूं। आप जिस प्रकार भी कहेंगे, मैं आपको सहयोग दूंगा।’’ शोरी ने गहरी साँस लेते हुए कहा।
‘‘हो सकता है आपको अदालत में कोई ऐसा बयान देना पड़ जाये जो आपकी कंपनी के हित में न हो।’’

‘‘मैं सब कुछ करने के लिये तैयार हूं। जब मेरी कंपनी दोषी है तो मैं उसका पक्ष क्यों लूंगा। किन्तु इस समय तो कंपनी के सारे उच्चाधिकारी आस्ट्रेलिया में हैं।’’
‘‘वे आस्ट्रेलिया में क्या कर रहे हैं?’’
‘‘वहाँ कोई नया प्रोजेक्ट चल रहा है। जिसके डेवलपमेन्ट के लिये वे वहाँ गये हैं।’’
‘‘उन्हें मैं बाद में देखूंगा। आपसे जो कुछ मैंने कहा है, उसे याद रखियेगा।’’ इं-त्यागी ने उठते हुए कहा।

इं-त्यागी के जाने के बाद शोरी कुछ देर तक बैठा कुछ सोचता रहा। उसके चेहरे पर चिन्ता की रेखाएं स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ रही थीं। फिर उसने फोन उठाया और एक नम्बर मिलाने लगा। नम्बर मिल जाने पर वह माउथपीस पर बोलने लगा,
‘‘हैलो--मैं शोरी बोल रहा हूं। अभी अभी इं-त्यागी यहाँ से उठकर गया है। दीनानाथ की मृत्यु के बारे में बता रहा था--शायद सड़क दुर्घटना या हत्या---मैंने उससे यह नहीं बताया कि उच्चाधिकारियों ने मेरे द्वारा उसे राहुल से टकराने का आदेश दिया था। क्योंकि इससे मेरी पोजीशन और खराब हो जाती। ---मेरी स्वयं भी समझ में नहीं आ रहा है कि उच्चाधिकारियों ने ऐसा आदेश क्यों दिया। हो सकता है उन्होंने दीनानाथ को कोई डायरेक्ट आदेश दिया हो।--ओ-के- ध्न्यावाद।’’ उसने फोन रख दिया और सिगरेट सुलगाने लगा। अब उसके चेहरे से चिन्ता की लकीरें गायब हो चुकी थीं।
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1 comment:

Jandunia said...

महत्वपूर्ण पोस्ट, साधुवाद