Thursday, June 3, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 36

‘‘बाहर जीप में एक लाश पड़ी है। उसे पोस्टमार्टम के लिये भेज दीजिए। और पता लगाईए कि मृतक कहाँ रहता था। आप रामसिंह की सहायता ले सकते हैं। क्योंकि इसने उसे अम्बेडकर रोड पर देखा था।’’ सुंदरम ने थानेदार से कहा और थानेदार बाहर जाने लगा। उसके पीछे इं-त्यागी भी चल पड़ा।
‘‘राहुल उस व्यक्ति से कितने दिनों पहले टकराया था?’’ सुंदरम ने रामसिंह से पूछा।

‘‘यही कोई आठ नौ दिनों पहले की बात है।’’
‘‘यानि गृहमन्त्री की हत्या के पहले यह घटना हुई थी। हो न हो, इसका सम्बन्ध् अवश्य गृहमन्त्री की हत्या से है।’’ वह अपने आप से बड़बड़ाया। फिर वह उठा और बाहर जाने लगा। वह जीप वाले व्यक्ति को एक बार फिर देखना चाहता था। अभी वह कुछ ही कदम चला होगा कि थानेदार और इं-त्यागी वापस आ गये।

‘‘मैंने उस व्यक्ति की शिनाख्त कर ली है।’’ इं-त्यागी बोला।
‘‘कौन है वह?’’ सुंदरम ने पूछा।

‘‘वह बी-सी-ओ- कम्पनी का कार्यकर्ता दीनानाथ है। जब मैं बी-सी-ओ- कम्पनी में छानबीन के लिये गया था उस समय वह मुझे मिला था। और वही मुझे बी-सी-ओ- की स्थानीय प्रयोगशाला ले गया था।’’
‘‘क्या मैं बी-सी-ओ- को इसके बारे में सूचित कर दूं?’’ थानेदार ने पूछा।
‘‘जी हाँ। आप उसे इसकी सूचना दे दें।’’ सुंदरम ने कहा। फिर इं-त्यागी से बोला, ‘‘यह एक हत्या भी हो सकती है।’’

‘‘वह किस प्रकार?’’
‘‘शायद यह अपराधियों में से था। इसके ऊपर वालों ने यह समझा कि पुलिस इस तक पहुंच सकती है अत: इसकी हत्या कर दी गयी।’’
‘‘किन्तु हम लोग तो इसके आसपास भी नहीं थे।’’ इं-त्यागी बोला।
‘‘अभी तो नहीं थे किन्तु बाद में पहुंच सकते थे। राहुल से पूछताछ में हो सकता था कि यह बात खुल जाती कि कोई उससे उस समय टकराया था जब वह पैकेट पहुंचाने साफ्ट प्रो जा रहा था और वह टकराने वाला व्यक्ति दीनानाथ था।’’

‘‘किन्तु दोनों की टक्कर में ऐसी क्या विशेष बात थी कि हम दीनानाथ पर शक करने लगते?’’
‘‘परिस्थितियां अब ऐसी हो गयी हैं कि केस से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति से सम्बंधित छोटी से छोटी घटना को भी सन्देह की दृष्टि से देखना पड़ेगा। हो सकता है राहुल गिरधारीलाल के पास से प्रोग्राम की सीडी ले जा रहा हो, बीच में दीनानाथ आ टकराया हो और उसने राहुल की सीडी बदल दी। अब नकली सीडी जिसमें घातक प्रोग्राम था राहुल के पास पहुंच गयी और असली दीनानाथ के पास।’’

‘‘जिसे उसने बी-सी-ओ- के पास पहुंचा दिया।’’ इं-त्यागी ने सुंदरम की बात पूरी की।
‘‘फिलहाल हमें यही मानना पड़ेगा।’’
‘‘मानना क्यों पड़ेगा? यह तो पूरी तरह साफ मामला है।’’

‘‘नहीं। यह पूरी तरह साफ नहीं है। सवाल ये उठता है कि बी-सी-ओ- ने दीनानाथ को क्यों मरवाया? इस प्रकार तो उसपर सीधे शक करने की बात आ गयी। क्योंकि सभी को पता है कि दीनानाथ बी-सी-ओ- में काम करता था।’’
‘‘किन्तु बी-सी-ओ- को यह कहाँ पता है कि हम राहुल और दीनानाथ के बीच हुई टक्कर को जान गये हैं।’’

‘‘तब तो दीनानाथ को मरवाने का बिल्कुल कोई औचित्य नहीं था। क्योंकि उस दशा में कोई उस तक नहीं पहुंच सकता था।’’
‘‘हो सकता है यह केवल एक दुर्घटना हो।’’
‘‘यही माना जा सकता है फिलहाल।’’ सुंदरम की आँखें सोच में डूबी हुई थीं।
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