Monday, May 31, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 35


सुंदरम जीप द्वारा वापस थाने जा रहा था। इस समय वह जिस स्थान पर से गुजर रहा था वह कुछ सुनसान था। फिर उसे अपनी जीप की गति धीमी कर लेनी पड़ी क्योंकि सामने कोई व्यक्ति औंधे मुंह पड़ा हुआ था। उसने जीप उस व्यक्ति के पास जाकर रोकी और नीचे उतरकर उसका अवलोकन करने लगा।
वह व्यक्ति मृत था। किसी भारी गाड़ी के पहिए ने उसकी गर्दन चकनाचूर कर दी थी। किन्तु चेहरा सही सलामत था।

कुछ देर वह वहीं उस व्यक्ति का निरीक्षण करता रहा फिर उसे जीप में डालकर चल पड़ा।
थाने पहुंचकर उसने जीप बाहर ही खड़ी की और स्वयं अन्दर आ गया इस समय वहां इं-त्यागी नहीं था। वह स्थानीय थानेदार के साथ कहीं गया हुआ था।

‘‘जीप में एक व्यक्ति की लाश है। एक सड़क दुर्घटना में उसकी मृत्यु हो गयी है। उसके बारे में पता करो कि वह किसकी लाश है। और जब थानेदार आ जाये तो उसे पोस्टमार्टम के लिये भेज देना।’’ थाने में उपस्थित सिपाहियों से उसने कहा और दो तीन सिपाही बाहर निकल गये।

कुछ देर बाद वे सिपाही वापस आ गये और सुंदरम के सामने जाकर खड़े हो गये।
‘‘क्या बात है?’’ सुंदरम ने उनसे पूछा।

‘‘सर सिपाही रामसिंह का कहना है कि उसने उस व्यक्ति को पहले कहीं देखा है।’’ एक सिपाही ने दूसरे की ओर संकेत करते हुए कहा।
‘‘क्यों रामसिंह तुमने उसे कहाँ देखा था?’’

‘‘सर, मैंने उसे अम्बेडकर रोड पर बस स्टाप के पास देखा था।। मेरा विचार है कि मृतक वहीं रहता था।’’
‘‘किन्तु अम्बेडकर रोड पर तो सैंकड़ों व्यक्ति आते जाते रहते हैं। फिर तुम कैसे कह सकते हो कि यह वही व्यक्ति है जिसे तुमने देखा था और तुम्हें उसका हुलिया कैसे याद रह गया?’’ सुंदरम ने पूछा।

‘‘सर बात कुछ ऐसी हुई कि मुझे उसका हुलिया याद रह गया। उस समय एक केस के सिलसिले में मेरी ड्‌यूटी वहाँ लगी थी। उसी समय उस स्थान पर एक के बाद एक तीन टक्करें हुईं। मैं सोच रहा था कि उस स्थान पर आज क्या हो गया है कि लोग एक दूसरे से टकरा रहे हैं। फिर जब तीसरी टक्कर हुई तो मैंने टकराने वाले व्यक्तियों के चेहरे गौर से देखे। उसके बाद भी मैं उन्हें भूल चुका था किन्तु इस बीच उनमें से एक व्यक्ति हमारे थाने के लाकअप में बन्द हो गया। इस प्रकार जब मैंने मृतक को देखा तो मुझे वह टक्कर याद आ गयी।’’

‘‘लगता है मृतक लोगों से टकराने का आदी था। किन्तु भूलवश अन्तिम बार वह किसी ट्रक से टकरा गया और इस प्रकार यह परलोक सिधार गया।’’ सुंदरम बोला, ‘‘उस व्यक्ति का क्या नाम है जो लाकअप में बन्द है और मृतक से टकराया था?’’

‘‘राहुल है उसका नाम। वह आप ही लोगों द्वारा लाया गया था।’’ रामसिंह ने बताया।
‘‘क्या??’’ सुंदरम अपनी कुर्सी पर सीधा होकर बैठ गया। उसी समय इं-त्यागी ने थाने में प्रवेश किया साथ में थानेदार भी था।
‘‘क्या बात है मि0सुंदरम?’’ थानेदार ने पूछा।

1 comment:

seema gupta said...

bhut rochak...aage..

regards