Friday, May 28, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 34


‘‘मि० गिरधारीलाल, राहुल के लिये मकान का प्रबन्ध् आप ही ने किया था?’’ सुंदरम ने पूछा। इस समय वह गिरधारीलाल के आफिस में बैठा उससे बात कर रहा था।
‘‘जी हाँ। उसे मकान की समस्या थी। और मेरा वह मकान दो वर्षों से खाली पड़ा था। अत: मैंने उसे वह दे दिया।’’

‘‘तो क्या दो वर्षों से उसे किसी ने इस्तेमाल नहीं किया?’’
‘‘नहीं। मुझे उसे प्रयोग करने की कभी जरूरत नहीं पड़ी। पहले मैं वहीं रहता था किन्तु जब मेरा बिजनेस काफी चमक गया तो मैंने वह मकान छोड़कर एक बंगला ले लिया। उसके बाद वह मकान खाली हो गया।’’

‘‘क्या उस मकान में कोई तहखाना भी है?’’
‘‘जी हाँ। मैंने कम्प्यूटर के उपकरण बनाने की मशीनें लगाने के लिये एक तहखाना बनवाया था। किन्तु उसका कभी इस्तेमाल नहीं किया। लेकिन आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं?’’

‘‘इसलिये क्योंकि अब वह तहखाना इस्तेमाल किया जा रहा है।’’ जी-सुंदरम ने राहुल की गिरफ्तारी के साथ पूरी बात बतायी।
‘‘हे भगवान। मुझे मालूम नहीं था कि मेरे मकान में इस तरह का खेल खेला जा रहा है। पता नहीं यह कितने अर्से से है।’’ गिरधारीलाल के चेहरे पर विस्मय की रेखाएं थीं।

‘‘उन राईफलों पर खोका नाम खुदा हुआ था। अर्थात वह तहखाना खोका के अधिकार में था।’’ सुंदरम ने बताया।
‘‘ओह! तो वह आतंकवादी संगठन मेरे ही मकान में कब्जा जमाये हुए था। लेकिन राहुल को क्यों गिरफ्तार किया गया? क्या वह भी उस संगठन में सम्मिलित है?’’

‘‘हाँ। उसपर भी खोका में सम्मिलित होने का संदेह है।’’
‘‘और मैं समझता था कि वह सीध् सादा गाँव का युवक है। यदि मुझे यह मालूम होता तो मैं उसे कदापि नौकरी पर नहीं रखता। मैंने तो उसे रामदयाल की सिफारिश पर रखा था।’’
‘‘रामदयाल से आपकी दोस्ती कितनी पुरानी है?’’ सुंदरम ने सवाल किया।

‘‘रामदयाल से मेरी पहली मुलाकात दो वर्ष पहले जगदीश कुमार के अफिस में हुई थी। जगदीश कुमार की दोस्ती मुझसे और रामदयाल दोनों से थी। बाद में किन्हीं कारणवश मेरी जगदीश कुमार से दोस्ती टूट गयी किन्तु रामदयाल से अब तक मित्रता बनी हुई है।’’

‘‘जगदीश कुमार से आपकी दोस्ती किस कारण टूटी थी?’’
‘‘बहुत छोटी सी बात थी। पिछले साल इलेक्शन में वह दूसरी पार्टी का पक्ष ले रहा था और मैं दूसरी का। इसी बात पर मतभेद इतना बढ़ा कि हमारी दोस्ती टूट गयी।’’ गिरधारीलाल ने बताया।

‘‘ठीक है। अगर आपका इन बातों में कोई हाथ नहीं है तो मैं कोशिश करूंगा कि खोका के सम्बन्ध् में आपका नाम न आने पाये।’’ सुंदरम ने उठते हुए कहा।
‘‘इसके लिये मैं आपका आभारी रहुंगा। अपने उस मकान के कारण मैं सन्देह के घेरे में तो आ ही गया हूं। मैं आपको हर प्रकार का सहयोग देने के लिये तैयार हूं।’’ गिरधारीलाल ने सुंदरम के साथ खड़े होते हुए कहा।

कुछ देर बाद सुंदरम की टैक्सी रामदयाल के घर जा रही थी। वहाँ पहुंचने पर मालूम हुआ कि रामदयाल अभी तक बाहर से नहीं लौटा है। अत: उसे बाहर ही से लौटना पड़ा।
-------