Tuesday, May 25, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 33

‘‘यदि ऐसी बात हुई होगी तो हमें यह मानना पड़ेगा कि खोका और बी-सी-ओ- में कोई साँठगाँठ है। यह साँठगाँठ किस प्रकार की हो सकती है?’’ सुंदरम ने शून्य में घूरते हुए कहा, ‘‘शायद इस प्रकार की कि बी-सी-ओ- ने खोका के लिये कोई घातक प्रोग्राम बनाया और खोका ने उसके बदले में कोई अनुबंध् किया। ऐसा अनुबंध् जो बी-सी-ओ- अर्थात आस्ट्रेलियाई कंपनी के हित में था। और हो सकता है, उस अनुबंध् का सम्बन्ध् खोका की माँग से भी हो। किन्तु खोका ने अपनी माँग बहुत पहले रख दी थी। और बी-सी-ओ- का नाम कहीं बाद में आया। इसका मतलब ये हुआ कि खोका की माँग बी-सी-ओ- से स्वतन्त्र थी।’’ सुंदरम के चेहरे पर सोच की गहरी लकीरें आ गयी थीं।

‘‘हो सकता है कि खोका का सम्बन्ध् पहले ही से बी-सी-ओ- से रहा हो।’’
‘‘एक मिनट--सुंदरम ने इं-त्यागी को हाथ उठाकर रोका। हम खोका का बी-सी-ओ से सम्बन्ध् दो बातों के कारण साबित कर रहे हैं। एक तो राहुल का खोका में होने का अनुमान और दूसरे बी-सी-ओ- कंपनी का साफ्ट प्रो के समान प्रोग्राम मीटिंग में प्रस्तुत करना। किन्तु यह दोनों ही बी-सी-ओ- के खोका से सम्बंधित होने के लिये ठोस दलीलें नहीं हैं। साफ्ट प्रो पर भी यह दलीलें फिट हो सकती हैं।’’

‘‘किन्तु साफ्ट प्रो को हम इसलिये सन्देह से परे कर रहे हैं कि वह स्वयं घातक प्रोग्राम बनाकर अपने ही प्रतिनिधि द्वारा गृहमन्त्री की हत्या नहीं करा सकती। इससे तो उसपर सीधे हत्या में सम्मिलित होने का सन्देह किया जायेगा।’’

‘‘यदि हम एक अन्य पहलू पर गौर करें तो हमें दोनों कम्पनियों को सन्देह से बाहर रखना पड़ेगा। दोनों ही कम्पनियों ने अपने प्रतिनिधि मीटिंग में भेजे थे और दोनों की घातक प्रोग्राम द्वारा हत्या हुई। क्या कोई कंपनी अपने ही प्रतिनिधि की हत्या करा सकती है?’’ जी-सुंदरम ने दूसरी सिगरेट सुलगाई क्योंकि पहली जलते हुए उसकी उंगलियों तक पहुंच गयी थी।
‘‘तो फिर कोई तीसरी कंपनी?’’

‘‘हाँ। तीसरी कंपनी की काफी संभावनाएं हैं। यही कारण है कि मैं इन दोनों विदेशी कंपनियों के साथ गिरधारीलाल और रामदयाल को भी शक के घेरे में रख रहा हूं। यदि राहुल खोका का सदस्य है तो रामदयाल खोका के लिये घातक प्रोग्राम बना सकता है क्योंकि राहुल से सम्बन्ध् होने के कारण उसका खोका से सम्बन्ध् हो सकता है।
यदि राहुल खोका का सदस्य नहीं है तो गिरधारीलाल को खोका का सदस्य माना जा सकता है। क्योंकि उसी ने राहुल को वह मकान दिलाया था।’’

‘‘किन्तु इस प्रकार फिर वही सवाल उठता है कि साफ्ट प्रो और बी-सी-ओ- के प्रोग्राम समान कैसे हो गये? जैसा कि वे कहते हैं।’’
‘‘इसके बारे में हमें यह थ्योरी माननी पड़ेगी कि दोनों विदेशी कंपनियों में से कोई एक दूसरे की जासूसी करती है।’’

‘‘दोनों कुछ पलों के लिये मौन रहे फिर इं-त्यागी ने पूछा, ‘‘फिर अब हमारा अगला कदम क्या होना चाहिए?’’
‘‘तुम राहुल से पूछताछ करो। मैं गिरधारीलाल और रामदयाल को टटोलता हूं।’’ सुंदरम ने जवाब दिया।
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1 comment:

seema gupta said...

interesting

regards