Saturday, May 22, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 32


राहुल को लाकअप में डाल दिया गया।
‘‘यह पहला व्यक्ति है खोका संगठन का जो हमारे हाथ लगा है।’’ इं-त्यागी बोला। इस समय वह जी सुंदरम के साथ उस थाने में बैठा था जहाँ राहुल बन्द था। राहुल का मकान सील करके पेटियां पुलिस ने अपने कब्जे में ले ली थीं।

‘‘हूं। यह भी हो सकता है कि वह निर्दोष हो। हो सकता है जैसा कि वह कहता है कि यह मकान गिरधारीलाल ने उसे दिलाया था, यह मकान उसकी अनभिज्ञता में दूसरे लोग प्रयोग करते हों।’’
‘‘अगर ऐसी बात थी तो उसने हमें उस कमरे में जाने से क्यों रोका था। और जब हमने फिर कहा तो उसने भूत का बहाना बनाया। जबकि उसने जिस अस्थिपंजर का उल्लेख किया था, वह तहखाने में कहीं नहीं मिला।’’

‘‘हो सकता है असली मुजरिमों ने वह अस्थिपिंजर गायब कर दिया हो। क्योंकि वह केवल राहुल को दिखाने के लिये था।’’ सुंदरम ने एक और दलील दी।
‘‘लेकिन जब जब हम उसके पास गये, वह घबरा गया। क्या उसकी घबराहट उसे मुजरिम नहीं साबित करती?’’ इं-त्यागी ने फिर राहुल के खिलाफ सुबूत दिया।

‘‘मैं यह नहीं कह रहा हूं कि राहुल एकदम निर्दोष है। किन्तु हमें हर पहलू पर विचार करना पड़ेगा। तुम उससे पूछताछ करो। यदि उसने मुजरिम होना स्वीकार कर लिया तो हमारे लिये काफी आसानी हो जायेगी। मेरा विचार है कि वह खोका का साधारण कार्यकर्ता है। हमें खोका के मुखिया तक पहुंचना है जो अभी हमारी पहुंच से बहुत दूर है।
मैं समझता हूं कि यदि राहुल खोका का कार्यकर्ता है तो भी वह अपने मुखिया के बारे में कुछ नहीं जानता होगा।’’

‘‘मैं उससे पूछताछ करता हूं। कुछ न कुछ तो पता चल ही जायेगा।’’
‘‘और अन्य कंपनियों पर भी अपनी दृष्टि रखना। बी-सी-ओ- आजकल क्या कर रही है? उसके प्रोग्राम पर तो गृहमन्त्री की हत्या के कारण कुछ फैसला हो ही नहीं पाया।’’

‘‘अब वह अपना प्रोग्राम प्रधानमन्त्री तक पहुंचायेगी। वैसे उसके शीर्ष अधिकारी आजकल अपने मूल देश आस्ट्रेलिया में कोई प्रोजेक्ट देख रहे हैं।’’
‘‘और साफ्ट प्रो कंपनी?’’

‘‘वह कोई नया प्रोग्राम बना रही है। क्योंकि पिछली बार तो उसका और बी-सी-ओ- का एक ही प्रोग्राम हो गया था अत: इस बार वह पूरी गोपनीयता बरत रही है। मि0सुंदरम आपका क्या विचार है, क्या उसका प्रोग्राम राहुल द्वारा बी-सी-ओ- तक पहुंचा होगा?’’

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