Wednesday, May 19, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 31


‘‘क्यों? अन्दर ऐसी क्या खास बात है?’’ इं-त्यागी ने पूछा।
‘‘बात यह है इंस्पेक्टर साहब कि अन्दर भूत हैं। इसी कारण मैंने उधर ताला लगा दिया है।’’

‘‘भूत हैं?’’ सुंदरम ने आश्चर्य से कहा, ‘‘कैसे भूत?’’
राहुल ने अपने साथ घटी पूरी घटना कह सुनाई। सुनाने के पश्चात उसने एक बार फिर दोनों को अन्दर जाने से रोका।

‘‘हम भी देखते हैं कि वह किस प्रकार का भूत है। इं-त्यागी ताला खोल दीजिए।’’ सुंदरम ने कहा और इं-त्यागी कुन्जी लेकर ताला खोलने लगा।
फिर वे लोग अन्दर के कमरों में पहुंच गये। राहुल तीसरे कमरे में नहीं जाना चाहता था किन्तु सुंदरम ने उसका हाथ पकड़ लिया और इस प्रकार उसे वहाँ जाना पड़ा।

उस कमरे में इस समय केवल एक मेज दिखाई पड़ रही थी। इं-त्यागी आगे बढ़कर मेज का निरीक्षण करने लगा। फिर उसने मेज के एक कोने पर दबाव डाला। एक गड़गड़ाहट की आवाज हुई और मेज पूरी की पूरी फर्श के नीचे धंस गयी।
अब वहाँ एक गड्‌ढा दिखाई दे रहा था।

‘‘इसमें तो नीचे जाने के लिये सीढ़ियां हैं। लगता है यह कोई तहखाना है।’’ त्यागी ने नीचे झांकते हुए कहा।
‘‘नीचे उतरकर देखते हैं कि यह गोरखधंधा क्या है।’’ जी-सुंदरम ने कहा और राहुल का हाथ पकड़े हुए आगे बढ़ आया। वे लोग नीचे उतरने लगे। जैसे ही इं-त्यागी ने सबसे निचली सीढ़ी पर पैर रखा, पूरा तहखाना रौशनी में नहा गया। शायद निचली सीढ़ी का सम्पर्क किसी स्विच से था जो वहाँ पैर रखते ही ऑन हो गया था और तहखाने में रौशनी फैलाने वाला बल्ब जल गया था।

इस रौशनी में उन्होने वहाँ पाँच छह लकड़ी की बड़ी बड़ी पेटियां रखी देखीं।
‘‘यहाँ तो कुछ और ही कहानी दिखाई पड़ रही है। इन पेटियों में क्या हो सकता है?’’ सुंदरम ने कहा।

‘‘खोलकर देख लेते हैं।’’ इं-त्यागी आगे बढ़ा और उसने एक पेटी का ढक्कन जो कीलों द्वारा जकड़ा हुआ था, थोड़े प्रयास के बाद खोल दिया। जैसे ही उसने ढक्कन उठाया, उसकी आँखें आश्चर्य के कारण फैल गयीं।
‘‘ओह यह क्या?’’ उसने कहा और सुंदरम भी आगे की ओर झुक आया। उसके साथ राहुल भी पेटी पर झुक गया।

पूरी पेटी अत्याधुनिक विदेशी राईफलों से भरी पड़ी थी। ऐसी राईफलों का अभी तक भारत में नाम भी नहीं सुनाई पड़ा था। इससे अधिक विशेष बात यह थी कि राईफलों पर खोका नाम खुदा हुआ था।
इं-त्यागी ने दूसरी पेटी खोली। उसमें भी अत्याधुनिक हथियार भरे हुए थे।

‘‘यह तहखाना तो किसी आतंकवादी संगठन का शास्त्रागार है।’’ सुंदरम ने कहा।
‘‘और वह संगठन खोका है।’’ इं-त्यागी ने एक राईफल उठाकर उसका निरीक्षण करते हुए कहा।

‘‘य--ये सब क्या है? यह हथियार इस मकान में कैसे आ गये?’’ राहुल ने परेशान होकर कहा और तब सुंदरम और इं-त्यागी ने उसकी ओर ध्यान दिया।
‘‘यह तो तुम ही बताओगे कि यह हथियार तुम्हारे मकान में कैसे हैं?’’ इं-त्यागी ने उसकी ओर देखते हुए कहा।
‘‘मैं आपका मतलब नहीं समझा।’’ राहुल की समझ में कुछ नहीं आया।

‘‘मतलब सीधा है। तुम्हें खोका का साथी होने के कारण गिरफ्तार किया जाता है।’’ इं-त्यागी ने रिवाल्वर निकाल लिया था।
‘‘क--क्या कह रहे हैं इंस्पेक्टर साहब। यह बिल्कुल गलत है। मेरा खोका से कोई सम्बन्ध् नहीं है।’’ राहुल ने घबराकर कहा।
‘‘यह अब तुम अदालत में साबित करना। फिलहाल मैं तुम्हें गिरफ्तार कर रहा हूं।’’ इं-त्यागी ने जेब से हथकड़ी निकालकर राहुल को पहना दी।

राहुल अब बिल्कुल मौन हो गया था। उसके चेहरे पर हवाईयाँ उड़ रही थीं। जबकि सुंदरम किसी सोच में डूबा हुआ था।      
-------    

2 comments:

Arvind Mishra said...

क्या यह उपन्यासिका बन रही है ?

seema gupta said...

अच्छी लगी.....अगली कड़ी का इन्तजार....

regards