Sunday, May 16, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 30


राजनगर पहुंचकर वह इं-त्यागी से मिला।
‘‘सबसे पहले तुम मुझे राहुल के बारे में बताओ।’’ जी-सुंदरम ने उससे कहा।

‘‘अभी तक कोई ऐसी खास बात नहीं हुई है कि उसे मुजरिमों का साथी मान लिया जाये। किन्तु उसपर शक ज़रूर किया जा सकता है। जब मैं उससे मिला, उसके बाद घर जाने के बाद उसने मकान में ताला लगाया और एक अन्य मकान के पास पहुंचा जहाँ ताला लटक रहा था। कुछ देर वहाँ रुकने के बाद वह वापस लौट आया। घर आकर उसने अन्दर सब कमरे बन्द कर दिये और अब केवल बाहरी कमरे में रह रहा है। क्या यह सब बातें उसे मुजरिमों का साथी मानने के लिये पर्याप्त हैं?’’

‘‘पर्याप्त से भी अधिक । यह जानना आवश्यक है कि उसने भीतरी मकान बन्द क्यों कर दिया। और वह मकान किसका था जहाँ वह गया था और ताला लगा देखकर वापस आ गया था।’’
‘‘उसके बारे में पता चला है कि वह उसके मित्र रामदयाल का मकान था जो स्वयं कम्प्यूटर का बिजनेस करते हैं।’’

‘‘कम्प्यूटर का बिजनेस? तब तो उसे भी सन्देह के घेरे में रखना पड़गा। एक ऐसा व्यक्ति उससे मिलने जाता है जो कि स्वयं सन्देहास्पद है। मि0त्यागी आप रामदयाल की निगरानी के लिये भी प्रबंध कर लीजिए।’’
‘‘तो अब हमारे सन्देह के घेरे में चार कंपनियां आ गयी हैं। बी-सी-ओ-, गिरधारीलाल एण्ड कंपनी, साफ्ट प्रो और रामदयाल इंटरप्राइजेज़।’’
‘‘हाँ। अब हमें राहुल के घर की तलाशी लेनी है। इस बात का कारण जानने के लिये कि उसने भीतरी भाग बन्द क्यों किया। और अब यह हमारा पहला काम है।’’ जी-सुंदरम ने उठते हुए कहा।

जब वे लोग राहुल के मकान पर पहुंचे तो उस समय वह घर पर ही था। इन्हें देखकर वह खड़ा हो गया। साथ ही उसके चेहरे पर विस्मय के लक्षण भी उभर आये। वह थोड़ा घबरा भी गया। क्योंकि उसके गाँव में पुलिस किसी के घर तभी जाती थी जब उस घर का कोई व्यक्ति किसी अपराध में लिप्त होता था।

सुंदरम उसका चेहरा गौर से देख रहा था।

‘‘इंस्पेक्टर साहब आप! आईए बैठिए।’’ उसने इं-त्यागी को देखकर कहा। और चारपायी उनके सामने कर दी।
‘‘तुमने मकान का भीतरी भाग बन्द क्यों कर रखा है?’’ इं-त्यागी ने उससे सवाल किया।
राहुल उसके इस सवाल पर गड़बड़ा गया। उसे वह भूत भी याद आ गया और वह सोचने लगा कि इन्हें सच्ची बात बताये या नहीं।

‘‘तुमने जवाब नहीं दिया।’’ सुंदरम ने उसे टोका।
‘‘बात यह है कि मेरा काम एक ही कमरे से चल जाता है। पूरा मकान मेरे लिये बेकार है। अत: मैंने उधर ताला लगा दिया।’’ राहुल ने सच्ची बात छिपाने का निर्णय लिया।

‘‘तो फिर तुमने इतना बड़ा मकान क्यों लिया?’’ सुंदरम ने सवाल किया।
‘‘यह मकान तो मुझे कंपनी ने दे दिया। गिरधारीलाल जी ने मुझे मकान की समस्या से ग्रस्त देखकर यह मकान दिला दिया। क्या मैं आपके यहाँ आने का प्रायोजन जान सकता हूं?’’ राहुल ने सवाल किया।

‘‘मैं तुम्हारा मकान अन्दर से देखना चाहता हूं।’’ इं-त्यागी ने राहुल की बात अनसुनी करते हुए कहा।
‘‘अन्दर! म--मगर।’’ राहुल को हिचकिचाहट हुई।
‘‘हाँ। हमें ताले की कुन्जी दो।’’ सुंदरम ने कहा।

राहुल कुन्जी लाने के लिये उठा, फिर बोला, ‘‘आप लोग अन्दर न जाईए तो अच्छा होगा।’’       

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