Monday, May 10, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 28


काला चश्मा और लंबी कैप लगाये खोका संगठन का वह व्यक्ति एक बार फिर भारी भरकम व्यक्ति के सामने उसी साउंडप्रूफ कमरे में बैठा हुआ था जहाँ इससे पहले वे दोनों मिले थे।
‘‘तो पुलिस को यह पता लग गया कि गृहमन्त्री की हत्या में एक विशेष प्रकार का कम्प्यूटर प्रोग्राम प्रयुक्त किया गया  था।’’ भारी भरकम व्यक्ति अर्थात तान्त्रिक ने कहा।

‘‘हाँ। और अभी तक जिन लोगों पर पुलिस को शक है वे हैं साफ्ट प्रो, बी-सी-ओ- और गिरधारीलाल एण्ड कंपनी तथा राहुल।’’
‘‘गुड। पुलिस ने बिल्कुल सही कंपनियां चुनी हैं। वैसे क्या पुलिस हम तक पहुंच सकती है?’’

‘‘सवाल ही नहीं पैदा होता। केवल इस बात का पता लगाकर कि गृहमन्त्री की हत्या किस प्रकार हुई, असली अपराधी तक नहीं पहुंचा जा सकता। वैसे हम लोगों ने तो अपने बचाव के लिये पूरा प्लान बनाया है।’’
‘‘और वह प्लान ये है कि एक नकली अपराधी तक पुलिस को पहुंचाकर केस की फाइल बन्द करवा दी जाये। और वह नकली अपराधी भी हमें संयोग से काफी सीधा सादा मिल गया। मुझे उसकी मृत्यु पर थोड़ा अफसोस तो होगा ही।’’ तान्त्रिक ने कहा।

‘‘एक आलीशान भवन को बिजली से बचाने के लिये एक ताँबे की छड़ लगानी आवश्यक होती है। जो बिजली का समस्त वार झेलकर भवन को बचा लेती है। राहुल भी हमारे लिये ताँबे की छड़ का काम करेगा।’’
‘‘क्या यह आवश्यक है कि पुलिस उसको अपराधी मान ले?’’
‘‘हाँ। यह आवश्यक है। और इसका एक कारण है जो मैं अभी बताना उपयुक्त नहीं समझता। उसने अपने नये मकान में भूत देखे या नहीं?’’ खोका संगठन के व्यक्ति ने पूछा।

‘‘मेरा विचार है कि अभी नहीं । वरना वह किसी से उसका उल्लेख अवश्य करता। वैसे यह अच्छा ही है कि वह अभी उसके दर्शन न करे वरना यदि उसने मकान बदल लिया तो हमें समस्या होगी।’’
‘‘उन भूतों की आवश्यकता क्या थी? बिना उनके काम नहीं चल सकता था?’’

‘‘उनका उपयोग इसलिये किया जाता है ताकि उस मकान में रहने वाला खट पट की आवाज सुनकर उस कमरे के पास आये तो भूत देखकर भाग जाये और हमारे काम में व्यध्न न पड़े।’’ तान्त्रिक ने कहा।
‘‘सी-आई-डी का वह अफसर तो नागालैण्ड जा रहा है।’’ खोका के व्यक्ति ने बताया, ‘‘हमारे बारे में छानबीन करने।’’

‘‘क्या वह वहाँ से तुम्हारे बारे में कुछ सूत्र नहीं हासिल कर सकता?’’
‘‘यह असंभव समझ लो। हमने जिस उद्देश्य के लिये सरकार से माँग की थी, वहाँ तक वह कभी नहीं पहुंच सकता।’’

‘‘यह सब तुम समझो। किन्तु हम यह कभी नहीं चाहेंगे कि तुम्हारे साथ हम लोग भी फंस जायें।’’
‘‘नि’चंत रहो। ऐसा कभी नहीं होगा। न तो हम फंसेंगे और न तुम लोग।’’ खोका संगठन के व्यक्ति ने उठते हुए कहा।   
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