Saturday, May 8, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 27


राहुल ने जब से उस मकान में भूत देखा था, उससे एक पल के लिये भी वहाँ नहीं रुका जा रहा था। उसने अपना सामान जो थोड़ा सा था, सूटकेस में रखा और रामदयाल के घर की ओर चल पड़ा। वह इस बात से अनभिज्ञ था कि सादी वर्दी में एक पुलिस वाला उसका पीछा कर रहा है।

जब वह रामदयाल के मकान पर पहुंचा तो वहाँ एक बड़ा सा ताला लटक रहा था।
‘कमाल है। यहाँ ताला क्यों लटक रहा है? एक नौकर तो हर समय घर पर रहता था। जब वह आफिस जाता था तब भी घर खुला रहता था।’ वह आश्चर्य से बड़बड़ाया।

फिर उसने सोचा कि शायद नौकर आसपास किसी कार्य के लिये गया होगा। अत: वह एक करीबी ढाबे में जलपान के लिये चला गया। कुछ देर बाद जब वह वापस आया तो ताला ज्यों का त्यों था।
उसने पड़ोस का एक दरवाजा खटखटाया। जल्द ही दरवाजा खोलकर एक सज्जन बाहर निकले। उनसे पूछने पर पता चला कि रामदयाल कुछ दिनों के लिये बाहर गया है।

‘‘वे कहाँ गये हैं?’’ राहुल ने पूछा।
‘‘पता नहीं शायद पूर्वी भारत की ओर गये हैं।’’ उन सज्जन ने जवाब दिया।
राहुल ने उन्हें ध्न्यावाद दिया और वापस पलट गया।

‘इसका मतलब यह हुआ कि मुझे अभी कुछ दिन और उस भुतहा मकान में रहना पड़ेगा।’ राहुल ने अपने मन में कहा, ‘या फिर मैं गिरधारीलाल से कहकर दूसरा मकान ले लूं। लेकिन गिरधारीलाल इसपर विश्वास कहाँ करेगा। मेरी अभी इतनी पक्की सर्विस भी नहीं है कि बिना किसी कारण गिरधारीलाल मेरे लिये दूसरे मकान का प्रबंध कर दे।’

अन्त में उसने यही निश्चय किया कि वह फिलहाल उसी मकान में रहेगा। किन्तु केवल बाहरी कमरे में। इसके अलावा अन्दर मकान में जाने वाले दरवाजे पर ताला डाल देगा।
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