Thursday, May 6, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 26


जी-सुंदरम ने खोका की फाइल देख ली थी। उस फाइल में खोका द्वारा सरकार से की गयी माँगों का भी उल्लेख था। ये माँगें उसके मस्तिष्क में चकरा रही थीं। 
नागालैण्ड भारत के उन राज्यों में से एक है जहाँ म्यांमार की सीमा मिलती है। खोका ने नागालैण्ड तथा म्यांमार के कुछ क्षेत्र आपस में मिला देने की माँग की थी तथा उस क्षेत्र में म्यांमार - भारत की सीमा के दोनों ओर स्वतन्त्र आवागमन की बात उठायी थी। उसका कहना था कि कोई व्यक्ति यदि उसके इंगित किये गये क्षेत्र से बाहर जाये तो उसकी चेकिंग की जाये अन्यथा नहीं।

जब उस क्षेत्र के स्थानीय लोगों से इस बारे में बात की गयी तो वहाँ किसी को खोका के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही ऐसी किसी माँग की उन लोगों की इच्छा थी। अत: सरकार ने खोका की माँग मानने से इंकार कर दिया क्योंकि उसे इसमें किसी षडयन्त्र की बू आ रही थी। उसके बाद खोका ने महत्वपूर्ण लोगों की हत्या की ध्माकी दी और इस प्रकार अब तक वह तीन महत्वपूर्ण लोगों की हत्या कर चुका था।

उस फाइल में खोका की माँग का कारण भी लिखा हुआ था। जो खोका ने सरकार के सामने प्रस्तुत किया था। इसके अनुसार भारत के उस क्षेत्र में रहने वाले कई नागरिकों के सम्बन्धी सीमा के दूसरी ओर के क्षेत्र में रहते थे। इन नागरिकों के मिलने जुलने के लिये वहाँ की सीमा पर ढील देना आवश्यक था, और यही कारण था खोका की माँग का।

खोका की माँग का यह कारण सुंदरम को उपयुक्त नहीं लग रहा था।
‘यह संगठन अवश्य उस स्थान पर कुछ करना चाहता है।’ उसने अपने मन में कहा, ‘किन्तु क्या करना चाहता है? शायद यह नागालैण्ड जाकर ही पता लग पायेगा।’

वह विचारों में डूबा हुआ था तभी फोन की घंटी बजी। उसने फोन उठाया। दूसरी ओर इं-त्यागी था। उसने साफ्ट प्रो तथा गिरधारीलाल से हुई बातचीत का विवरण दिया।
‘‘मुझे राहुल नामक युवक पर संदेह है।’’, उसने कहा, ‘‘जब मैंने उसे बुलाया तो उसके चेहरे पर घबराहट के लक्षण थे। मुझे लगता है कि वह इस कांड में किसी न किसी रूप में सम्मिलित है।’’

‘‘उसपर दृष्टि रखो। उसके बारे में विस्तार से सारी जानकारी प्राप्त करो। साथ ही तीनों कंपनियों को भी संदेह के घेरे में रखो।’’ सुंदरम ने कहा।
‘‘तीन कंपनियां कौन कौन सी?’’ इं-त्यागी ने पूछा।

‘‘बी-सी-ओ-, साफ्ट प्रो और गिरधारीलाल एण्ड कंपनी तीनों पर ही संदेह किया जा सकता है।
बी-सी-ओ- कंपनी साफ्ट प्रो कंपनी की सीडी बदलकर उसके स्थान पर खोका की सीडी रख सकती है। गिरधारीलाल पर भी यही संदेह किया जा सकता है। जबकि साफ्ट प्रो पर यह सन्देह किया जा सकता है कि वह खोका से किसी समझौते के अन्तर्गत इस प्रकार का घातक प्रोग्राम बना सकती है।’’ सुन्दरम ने स्पष्ट किया।
‘‘ठीक है। मैं तीनों कंपनियों पर दृष्टि रखने के लिये अपने आदमी लगा देता हूं। और राहुल को मैं स्वयं चेक करता हूं।’’

‘‘तो फिर तुम राजनगर पर लग जाओ। मैं नागालैण्ड जा रहा हूं। क्योंकि वहाँ से मुझे खोका के बारे में कुछ सूत्र मिलने की आशा है।’’ सुंदरम ने खोका की माँग के बारे में बताया।
‘‘क्यों न राहुल को गिरफ्तार करके पूछताछ की जाये?’’

‘‘यह उचित नहीं होगा। क्योंकि अभी हमें उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं मिला है। यदि वह मुजरिमों का साथी होगा तो उसकी गिरफ्तारी के बाद वे लोग सावधान हो जायेंगे। फिर किसी सुबूत का मिलना और कठिन हो जायेगा।
वैसे तुम हर समय उसपर नजर रखो और अगर कोई ठोस सुबूत हाथ आ जाये तो उसे गिरफ्तार कर सकते हो।’’ सुंदरम ने फोन बन्द कर दिया।
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