Sunday, May 2, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 25


इं-त्यागी अब गिरधारीलाल के पास जा रहा था।
गिरधारीलाल अपने आफिस में ही मिला। वह अपने सेक्रेटरी रामकुमार वर्मा से कारोबार के बारे में बातचीत कर रहा था।
इं-त्यागी ने उससे अपना परिचय कराया। गिरधारीलाल ने उसे सामने कुर्सी पर बैठने का संकेत किया।

‘‘क्या साफ्ट प्रो कंपनी से आपका कोई अनुबंध चल रहा है?’’ त्यागी ने पूछा।
‘‘अनुबंध तो कोई नहीं है किन्तु कभी कभी हम लोग एक दूसरे की सहायता ले लेते हैं।’’
‘‘किस प्रकार की सहायता?’’

‘‘अक्सर हमें अपने बिजनेस में नई तकनीक की आवश्यकता पड़ती है, जो हमें साफ्ट प्रो कंपनी से मिल जाती है। इसी प्रकार साफ्ट प्रो कंपनी को भी भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने में हमारी आवश्यकता पड़ती रहती है। इस प्रकार हम एक दूसरे को सहयोग देते रहते हैं।’’
‘‘क्या इधर उसने हाल ही में कोई प्रोग्राम भेजा था जिसे चेक करके आपने उसे वापस कर दिया था?’’

‘‘हाल में --’’, गिरधारीलाल ने कुछ सोचते हुए कहा, ‘‘हाँ एक प्रोग्राम भेजा तो था। उसमें इण्टरनेट के द्वारा किसी व्यक्ति के सम्पर्क स्रोतों को तलाश किया जा सकता था। किन्तु बात क्या है?’’
‘‘क्या यहाँ से वापस भेजते समय वह सीडी चेक की गयी थी?’’, इं-त्यागी ने गिरधारीलाल की बात का कोई जवाब न दिया।

‘‘हाँ, हम लोगों ने वापसी के समय वह सीडी चेक की थी। क्या उन्हें असली सीडी नहीं मिली?’’
‘‘शायद यही हुआ है।’’, इं-त्यागी ने कहा, ‘‘साफ्ट प्रो तक सीडी किस माध्यम द्वारा पहुंचायी गयी थी?’’
गिरधारीलाल ने प्रश्नात्मक दृष्टि से अपने सेक्रेटरी की ओर देखा।

‘‘वह सीडी हमारी ही कंपनी का एक आदमी लेकर गया था।’’ सेक्रेटरी ने बताया।
‘‘क्या नाम है उस व्यक्ति का?’’

‘‘उसका नाम राहुल है। अभी वह कुछ ही दिन पहले इस कंपनी में आया है।’’
‘‘क्या वह इस समय होगा? मैं उससे मिलना चाहता हूं।’’

‘‘जी हाँ। इस समय वह आफिस में ही है। मैं बुला लाता हूं।’’ सेक्रेटरी उठ गया।
‘‘क्या विचार है आपका? क्या वह सीडी बदल सकता है?’’ इं-त्यागी ने गिरधारीलाल से पूछा।

‘‘असंभव तो नहीं । किन्तु मेरी जानकारी में वह ऐसा नहीं कर सकता। क्योंकि वह अभी हाल ही में शहर आया है और उससे पहले वह गाँव में रहता था। उसकी सिफारिश मेरे एक करीबी मित्र रामदयाल ने की थी।’’

राहुल जब सेक्रेटरी वर्मा के साथ अन्दर आया तो उसके चेहरे का रंग कुछ उड़ा उड़ा था जिसे इं-त्यागी की नज़रों ने भांप लिया। वैसे राहुल की यह घबराहट उस भूत के कारण थी जो उसने रात को देखा था।
‘‘साफ्ट प्रो कंपनी की सीडी तुम्ही ने पहुंचाई थी?’’ इं-त्यागी ने पूछा। राहुल याद करने लगा कि कौन सा सामान। क्योंकि अब तक वह कई जगह सामान पहुंचा चुका था।

‘‘तुमने यहाँ आने के बाद पहला सामान कहां पहुंचाया था?’’ गिरधारीलाल ने याद दिलाया और राहुल को याद आ गया।
‘‘हाँ। वह सामान मैंने साफ्ट प्रो कंपनी को पहुंचाया था।’’

‘‘क्या तुमने वही पैकेट पहुंचाया था जो यहाँ से मिला था?’’ इं-त्यागी ने राहुल की आँखों में देखते हुए पूछा।
‘‘जी हाँ। मुझे जो पैकेट मिला मैंने उसे वहाँ तक पहुंचा दिया।’’ राहुल ने सपाट चेहरे के साथ कहा।

‘‘क्या रास्ते में तुम कहीं और भी गये थे? अच्छी तरह से याद करके बताओ।’’ इं-त्यागी ने फिर पूछा।
‘‘नहीं। यहाँ से पैकेट मिलने के बाद मैं सीधा कंपनी गया था। वैसे भी वह मेरा पहला काम था और मुझे उसे पूरा करने की जल्दी थी।’’

‘‘ठीक है तुम जा सकते हो।’’ इं-त्यागी ने उससे कहा और वह वापस चला गया।
उसके जाने के बाद कुछ देर तक इं-त्यागी ने गिरधारीलाल से बातचीत की फिर उठ गया।
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