Thursday, April 29, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 24


इं- त्यागी एक बार फिर साफ्ट प्रो कंपनी के आफिस में सिंगली के सामने बैठा था।
‘‘मि0 सिंगली, क्या आप की कंपनी ने प्रोग्राम तैयार करने के लिये किसी अन्य कंपनी की भी सहायता ली थी’’
‘‘हाँ। गिरधारीलाल एण्ड कंपनी की। वैसे प्रोग्राम तो पूरा हमारी प्रयोगशाला में बना था, लेकिन उसे वहाँ इसलिये भेजा गया था कि यह चेक हो सके कि वह प्रोग्राम भारतीय परिस्थितियों से मेल खाता है या नहीं।’’

‘‘उस कंपनी की प्रोग्राम के बारे में क्या राय थी?’’
‘‘उनका कहना था कि प्रोग्राम पूरी तरह सही है, और गृहमन्त्री की मीटिंग के लिये पूरी तरह उपयुक्त है।’’

इं-त्यागी कुछ देर के लिये मौन होकर कुछ सोचने लगा, फिर उसने अगला प्रश्न किया, ‘‘गिरधारीलाल के पास से आने के बाद क्या आपने सीडी दोबारा चेक की थी?’’
‘‘चेक तो की थी। किन्तु सरसरी तौर पर। अर्थात हमने यह बात चेक की थी कि सीडी कहीं से खराब तो नहीं हो गयी है। और प्रोग्राम की लिस्ट देखी थी।’’

‘‘क्या यह संभव है कि प्रोग्राम की लिस्ट कम्प्यूटर की स्क्रीन पर कुछ और आये जबकि असली प्रोग्राम कुछ और हो?’’
‘‘बात यह है कि हम लोग प्रोग्राम को उसके नाम से पहचानते हैं। मान लिया कि मैंने एक्स वाई जेड के नाम से एक प्रोग्राम बनाया। एक अन्य व्यक्ति ने भी इसी नाम से उस सीडी पर दूसरा प्रोग्राम रिकार्ड कर दिया, तो मेरा प्रोग्राम नष्ट ह्रो जायेगा जबकि मैं यही समझूंगा कि मेरा प्रोग्राम सीडी पर मौजूद है।’’

‘‘तो हो सकता है कि आपके साथ यही हुआ हो। क्योंकि जो सीडी मेरे पास मौजूद है साफ्ट प्रो कंपनी के नाम से, उसमें एक दूसरा प्रोग्राम रिकार्ड है। और वही प्रोग्राम गृहमन्त्री तथा अन्य व्यक्तियों की मौत का कारण बना था।’’

‘‘क्या? यह कैसे हो सकता है?’’ सिंगली के चेहरे पर विस्मय और घबराहट के लक्षण थे, ‘‘हमारी सीडी उनकी हत्या का कारण बनी। किन्तु यह हुआ किस प्रकार?’’
इं-त्यागी ने उसे तरंगों वाली बात बता दी। सिंगली ने यह सुनकर अपना सर थाम लिया, ‘‘ओ माई गॉड। मैं सोच भी नहीं सकता था कि ऐसा भी हो सकता है। यह हमें फँसाने के लिये चाल भी हो सकती है।’’

‘‘किस प्रकार की चाल?’’ इं-त्यागी ने पूछा।
‘‘यदि हमारी सीडी के कारण वे मौतें हुई हैं तो इसका अर्थ लोग यह भी लगा सकते हैं कि हमारी कंपनी इन हत्याओं में सम्मिलित है।’’

‘‘आपके अनुसार यह साजिश कौन कर सकता है?’’
‘‘वे कंपनियां जो भारत में व्यापार के लिये हमसे होड़ कर रही हैं। मैं किसी का स्पष्ट नाम नहीं लेना चाहता।’’
‘‘क्या आप के पास इसका ठोस प्रमाण है?’’

‘‘इसी की तो कमी है। वरना अब तक मेरी कंपनी की ओर से कोई न कोई कार्यवाई हो चुकी होती।’’
‘‘यदि किसी कंपनी के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण मिले तो हमें सूचित कीजिएगा।’’ इं-त्यागी ने उठते हुए कहा।
‘‘अवश्य मि- त्यागी!’’ सिंगली बोला।
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1 comment:

seema gupta said...

रोचक कहानी... पिछली कुछ कड़ियाँ पढ़ नही पाए समय निकल कर जरुर पढ़ेंगे
regards