Thursday, April 22, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 20


‘‘ओह, तो ये बात थी। मि0भार्गव, क्या आप जानते हैं कि इन तरंगों का प्रयोग कहाँ किया गया था?’’
‘‘किसी के कत्ल में किया गया होगा। जिसका केस आपको दिया गया है।’’

‘‘जी हाँ। इनका प्रयोग गृहमन्त्री की हत्या में किया गया था।’’
‘‘ओह! आई सी। वह अपराधी भी वास्तव में कोई वैज्ञानिक होगा जिसने हत्या करने के लिये ऐसा तरीका आविष्कृत कर लिया।’’

‘‘मैं एक बात सोच रहा हूं प्रो0 भार्गव। संगीत में विभिन्न प्रकार के वाद्ययन्त्रों का प्रयोग होता है। और उनसे विभिन्न प्रकार की तरंगें निकलती हैं। क्या संयोग से ऐसा नहीं हो सकता कि उन तरंगों के कॉम्बिनेशन से इस प्रकार की घातक तरंगें उत्पन्न हो जायें?’’
‘‘हो सकता है। वैसे अब तक तो ऐसा नहीं हुआ है। किन्तु भविष्य के बारे में क्या कहा जा सकता है। और न केवल ऐसी तरंगें उत्पन्न हो सकती हैं बल्कि कुछ और गुणों वाली तरंगें भी उत्पन्न हो सकती हैं।’’

‘‘जैसे?’’
‘‘जैसे कि हम लोग सुनते ही रहते हैं कि तानसेन का राग दीपक दीपकों को जला देता था। तो यह खास आवृत्ति की तरंगों का ही कमाल हो सकता है। वैसे दीपक राग वाली बात सच थी या कोई किवंदती, यह तो इतिहास के गर्भ में छुप चुका है किन्तु मेरा विचार है कि तरंगों में वह अद्भुत शक्ति होती है जिनसे कई असंभव कार्य संभव किये जा सकते हैं।’’

‘‘सही कहा तुमने। जब इनकी सहायता से हत्या की जा चुकी है तो इनकी शक्तियों को नकारने का कोई औचित्य नहीं। सुंदरम ने कहा फिर अपनी घड़ी देखता हुआ बोला, ‘‘मैं अब चलता हूं। तुम्हारा काफी समय नष्ट किया।’’
‘‘समय कैसे नष्ट हुआ? तुम ने तो यहाँ आकर मेरे ज्ञान में वृद्धि की है। मैं अभी तक ऐसी तरंगों से अनभिज्ञ था’’, प्रो0 भार्गव ने सुंदरम से हाथ मिलाते हुए कहा।
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