Monday, April 19, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 19


‘‘हलो सुंदरम, बहुत दिन बाद दिखायी दिये।’’ प्रोफेसर भार्गव ने सुंदरम से हाथ मिलाते हुए कहा।
‘‘तुम्हारे पास तो मैं तब ही आता हूं जब किसी केस में वैज्ञानिक अड़चन आ जाती है। आज भी मैं तुम्हारे पास एक समस्या लेकर आया हूं।’’

‘‘वह तो मैं पहले ही समझ गया था कि तुम कोई न कोई वैज्ञानिक समस्या लेकर आये होगे। अब जल्दी से उसे बता दो ताकि मैं उसका हल दे सकूं।’’ 
सुंदरम ने अपनी जेब से कागज निकाला, ‘‘इस पर कुछ तरंगों की फ्रीक्वेंसी लिखी है। मुझे यह बताओ कि यदि यह सारी तरंगें एक साथ उत्पन्न की जायें तो उनका परिणाम क्या होगा?’’

प्रोफेसर भार्गव कुछ देर उन आवृत्तियों को देखता रहा फिर बोला, ‘‘अगर तुम कुछ देर ठहरो तो मैं टेस्ट करके बता सकता हूं कि ये किस प्रकार की तरंगें हैं।’’
‘‘ठीक है। मैं यहीं ठहरा हूं। तुम अपना काम करो।’’

प्रोफेसर भार्गव प्रयोगशाला के एक केबिन में चला गया जबकि सुंदरम वहीं टहलने लगा। वह अन्य वैज्ञानिकों को देख रहा था जो अलग अलग प्रयोगों में उलझे हुए थे।
एक स्थान पर उसने देखा कि एक मशीन से भाप निकल रही है। और वह भाप वायुमंडल में कोई आकृति बना रही है। वह उत्सुकता से उस प्रयोग को देखने लगा। फिर वह उस प्रयोग को करने वाले वैज्ञानिकों के पास पहुंच गया। 

‘‘यह आप किस प्रकार का प्रयोग कर रहे हैं?’’ उसने एक वैज्ञानिक से पूछा।
‘‘हम लोग त्रिआयामी प्रक्षेपण पर शोध कर रहे हैं। मीलों दूर बैठे किसी व्यक्ति का त्रिआयामी प्रतिबिम्ब वायुमंडल में बना देने को त्रिआयामी प्रक्षेपण कहते हैं।’’
‘‘इसकी उपयोगिता क्या होगी?’’

‘‘यही कि आप अपने स्थान पर बैठे हुए अपने किसी मित्र से इस प्रकार बातचीत कर सकेंगे मानो वह आपके सामने बैठा हो जबकि वह आपसे सैंकड़ों मील दूर किसी अन्य स्थान पर बैठा होगा इसके अलावा सार्वजनिक घोषणा करने के लिये टी-वी- रेडियो इत्यादि किसी माध्यम की आव’यक्ता नहीं होगी। घोषणा करने वाले का कई गुना बड़ा प्रतिबिम्ब वायुमंडल में दिखायी पड़ेगा और उसकी बात पूरी आबादी सुन लेगी।’’

‘‘क्या आपको अभी तक अपनी इस रिसर्च में कोई कामयाबी मिली?’’
‘‘अभी तो हम प्रारम्भिक दौर में हैं। इस हिसाब से हमें प्रारम्भिक सफलता मिलने लगी है।’’

सुंदरम एक बार फिर टहलने लगा। वह पूरी प्रयोगशाला घूम घूमकर देख रहा था।
लगभग आधे घण्टे बाद प्रोफेसर भार्गव अपने केबिन से बाहर निकला।

‘‘ये तरंगें तो बहुत खतरनाक हैं। वह सुंदरम के पास आकर बोला, ‘‘अगर इन्हें एक साथ उत्पन्न किया जाये तो यह बहुत बुरा प्रभाव डाल सकती हैं।’’
‘‘क्या इनसे किसी की मौत हो सकती है?’’

‘‘हाँ। यह पूरी तरंह घातक हैं। बात यह है कि इनकी फ्रीक्वेसी मनुष्य के मस्तिष्क की फ्रीक्वेंसी के तुल्य है। यानि किसी व्यक्ति की उपस्थिति में यदि इन्हें उत्पादित किया जाये तो ये तरंगें अनुनाद द्वारा उस व्यक्ति के मस्तिष्क की तरंगों का आयाम सैंकड़ों गुना बढ़ा सकती हैं। इस दशा में मस्तिष्क की रगें तीव्रता के साथ कंपन करती हुई फट सकती हैं और उन रगों के फटने का मतलब है मनुष्य की तुरंत मौत।’’

2 comments:

Asha said...

I liked this story very much .
I opened this blog for the first time.
Asha

jeevan mohite said...

Intrest bad raha hai......nice