Wednesday, April 14, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 17

‘‘मुझे केवल यह नहीं देखना है कि तुम्हारी सीडी या प्रोग्राम कहाँ गायब हो गया बल्कि महत्वपूर्ण ये है कि गृहमन्त्री की हत्या किस प्रकार हुई।’’ इं-त्यागी अपने मन में कह रहा था।
लगभग दस मिनट बाद वह बी-सी-ओ- कंपनी के कार्यालय में मैनेजर शोरी के सामने बैठा हुआ था।

‘‘मि०शोरी, गृहमन्त्री की मीटिंग में जो प्रोग्राम आपने भेजा था, वह कहाँ बना था?’’
‘‘यहीं राजनगर में हमारी कम्प्यूटर प्रयोगशाला है। वहाँ पर हमारे विशेषज्ञों ने उसे तैयार किया था।’’ शोरी ने जवाब दिया। 

‘‘क्या वहाँ पर उस प्रोग्राम का रफ डायग्राम मौजूद होगा?’’
‘‘अवश्य मि0त्यागी। लेकिन आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं?’’
‘‘तुम्हारी विरोधी कंपनी साफ्ट प्रो ने आरोप लगाया है कि तुम्हारी कंपनी ने उनका प्रोग्राम चुराया है। अत: मैं रफ डायग्राम देखकर मामला साफ कर लेता हूं।’’

‘‘अगर ऐसी बात है तो आप अवश्य अपना संदेह दूर कर लीजिए। लेकिन प्रोग्राम चुराने वाली बात सरासर गलत है। साफ्ट प्रो कंपनी हमारी कंपनी के सामने कुछ नहीं है। बात यह हुई होगी कि वे कोई अच्छा साफ्टवेयर नहीं बना पाये। अत: यह आरोप लगा दिया, अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए।’’

‘‘कोई भी बात रही हो। इस समय तो आप मेरे साथ अपनी कम्प्यूटर प्रयोगशाला चलिये, या किसी उचित व्यक्ति को मेरे साथ कर दीजिए।’’
‘‘मैं मि0दीनानाथ को अपने साथ कर देता हूं। ये ही उस दिन प्रयोगशाला से प्रोग्राम की सीडी लाये थे।’’

शोरी इं-त्यागी को साथ लेकर अपने कम्पार्टमेन्ट से बाहर आया जहाँ एक कुर्सी पर दीनानाथ बैठा कोई कार्य कर रहा था।
‘‘मि0दीनानाथ, आप इन्हें लेकर प्रयोगशाला जाईए और उस प्रोग्राम का रफ डायग्राम दिखा दीजिए जो आप गृहमन्त्री की मीटिंग के लिये लाये थे।’’
‘‘आईए मेरे साथ।’’ दीनानाथ बोला। फिर वे लोग प्रयोगशाला के लिए रवाना हो गये।

‘‘लगता है राजनगर कम्प्यूटर व्यापार का काफी बड़ा केन्द्र है। क्योंकि यहाँ जगह जगह पर कम्प्यूटर तथा उसके सामानो ंकी दुकानें इत्यादि दिखाई पड़ रही हैं।’’ इं-त्यागी ने कम्प्यूटर की कई दुकानों को लगातार देखते हुए कहा।
‘‘जी हाँ, यहाँ कम्प्यूटर के कई बड़े विक्रेता हैं। सामने रामदयाल की दुकान दिखाई पड़ रही है। वह भी काफी बड़ा स्थानीय विक्रेता है। थोड़ा और आगे गिरधारीलाल का कार्यालय है। ये लोग स्थानीय विक्रेताओं में सबसे आगे हैं।’’ दीनानाथ ने बताया।

कुछ देर बाद ये लोग बी-सी-ओ- कंपनी की प्रयोगशाला में थे। दीनानाथ ने प्रोग्राम का रफ डायग्राम निकालकर इं-त्यागी को दिखाया।
‘‘डायग्राम तो ठीक लग रहा है।’’ कुछ देर डायग्राम को देखने के बाद इं-त्यागी बोला, ‘‘किन्तु इसे वास्तविक प्रोग्राम से मिलाना पड़ेगा। मि0 दीनानाथ आप इस डायग्राम की एक फोटोकापी मुझे दे दीजिए।’’
‘‘ठीक है। मैं कुछ देर बाद इसकी एक कापी आपको भिजवा दूंगा।’’ दीनानाथ ने कहा।
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1 comment:

Arvind Mishra said...

कथा बहुत स्लो मोशन में चल रही है