Sunday, April 11, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 16


इं-त्यागी साफ्ट प्रो कंपनी के ब्रांच मैनेजर सिंगली से उसके आफिस में मिला।
‘‘मि0 सिंगली, गृहमन्त्री की हत्या के बारे में तो आपको मालूम ही है। मैं उस केस की तफ्तीश कर रहा हूं। और इस सम्बन्ध में मैं आपकी सहायता चाहता हूं।’’

‘‘मुझे आपकी सहायता करके प्रसन्नता होगी। किन्तु मैं इस बारे में आपको क्या सहयोग दे सकता हूं?’’
‘‘पहले तो आप यह बताईए कि गृहमन्त्री की मीटिंग में भेजा गया आपका प्रोग्राम क्या था? क्योंकि वह सीडी खो गयी है जिसमें आपका प्रोग्राम था।’’

फिर जो प्रोग्राम सिंगली ने बताया वह इं-त्यागी को आश्चर्यचकित करने के लिए काफी था।
‘‘कमाल है। यही प्रोग्राम तो बी-सी-ओ कंपनी का भी था। मैं वह प्रोग्राम देख भी चुका हूं।’’
‘‘यह कैसे हो सकता है? हमने यह प्रोग्राम---’’, सिंगली की बात अधूरी रह गयी क्योंकि उसी समय एक व्यक्ति ने बाहर से प्रवेश किया।

‘‘आईए सर।’’ सिंगली ने खड़े होते हुए कहा। फिर इं-त्यागी से आने वाले व्यक्ति का परिचय कराते हुए बोला, ‘‘इनसे मिलिए, ये हमारे डायरेक्टर मि0 लिपमान हैं।’’  
‘‘हैलो, मैं इं-त्यागी हूं।’’ त्यागराज ने मि0लिपमान से हाथ मिलाते हुए कहा।

‘‘बॉस, मि0त्यागी गृहमन्त्री की हत्या के केस के सिलसिले में यहाँ आये हैं, और ये एक अजीब बात कह रहे हैं।’’
‘‘क्या बात है?’’ लिपमान ने कुर्सी पर बैठते हुए पूछा। सिंगली ने प्रोग्राम वाली बात बतायी।

‘‘इसमें आश्चर्य की कोई बात नहीं। मि0त्यागी, बी-सी-ओ- कंपनी के जासूस हमारी एक एक चीज़ सूँघते हुए फिरते हैं। उन्होंने हमारा प्रोग्राम ट्रेस कर लिया होगा। वास्तव में बी-सी-ओ- कम्पनी इन्हीं सब धांधलियों से विश्व बाजार में अपना स्थान बना पायी है।’’

‘‘क्या आप अपने कामों में गोपनीयता नहीं बरतते?’’ इं-त्यागी ने पूछा।
‘‘हम तो पूरी गोपनीयता के साथ काम करते हैं। किन्तु काली भेड़ें तो हर जगंह मिल जाती हैं।’’ लिपमान ने जवाब दिया।

‘‘इं0 त्यागी’’, सिंगली बोला, ‘‘अभी आपने कहा कि मेरी कंपनी की सीडी खो गयी है। क्या वह आपके हाथ लगी थी?’’
‘‘असली बात यह है कि आपकी कंपनी की जो सीडी मेरे पास है, वह पूरी तरह खाली है। मुझे विश्वास है कि यहाँ से जो सीडी मीटिंग में भेजी गयी थी, वह खाली नहीं थी। इसी आधार पर मैंने कहा कि वह कोई और सीडी है। और यदि वह असली भी है तो उसका प्रोग्राम मिटा दिया गया है। अब मुझे देखना है कि किसने ऐसा किया और क्यों किया।’’ इं-त्यागी ने कहा।

‘‘सीधी सी बात है, यह उसी ने किया है जो हमारा प्रोग्राम उस मीटिंग में नहीं देखना चाहता था। उसी ने हमारी सीडी मीटिंग से पहले पार कर दी या उसका प्रोग्राम नष्ट कर दिया।’’ लिपमान बोला।
‘‘अच्छा, अब मैं चलता हूं। आवश्यकता पड़ने पर आपको फिर कष्ट दिया जायेगा।’’ इं-त्यागी उठते हुए बोला।
‘‘ज़रूर। हम लोग आपको हर तरह का सहयोग देने के लिए तैयार हैं।’’ लिपमान ने हाथ हिलाते हुए कहा।

कुछ देर बाद इं-त्यागी की जीप बी-सी-ओ- कंपनी की ओर जा रही थी।

2 comments:

Jandunia said...

आगे के पोस्ट का इंतजार है।

Arvind Mishra said...

कहानी काफी आगे बढ़ गयी है