Sunday, April 4, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 14


‘‘क्या तुमने उन सीडीज़ के प्रोग्राम चेक किये जो मैंने तुम्हें कल दी थीं?’’ इं-त्यागी ने कम्प्यूटर रूम के इन्चार्ज से पूछा।
‘‘यस सर। उसमें से एक सी-डी में तो प्रोग्राम है लेकिन दूसरी सीडी पूरी तरंह खाली है।’’ इन्चार्ज ने जवाब दिया।
‘‘खाली है?’’ इं-त्यागी ने आश्चर्य से कहा, ‘‘यह कैसे हो सकता है?’’

‘‘सर, आप स्वयं देख लीजिए।’’, इन्चार्ज ने एक अलमारी से दोनों सीडीज निकालीं। फिर उनमें से एक सीडी निकाल कर कम्प्यूटर में लगा दी। कुछ देर बाद कम्प्यूटर ने उस सीडी में उपस्थित प्रोग्राम की लिस्ट दर्शा दी।
‘‘यह पहली सीडी है, जिसमें प्रोग्राम मौजूद है। अब आप दूसरी सीडी देखिये।’’ इन्चार्ज ने दूसरी सीडी कम्प्यूटर में लगायी। इस बार कम्प्यूटर की स्क्रीन पूरी तरंह सादा रही। यानि इस सीडी में कोई प्रोग्राम नहीं था।

‘‘तो क्या दूसरी कंपनी ने अपना कोई प्रोग्राम नहीं भेजा था? लेकिन यह कैसे संभव है?’’ इं-त्यागी बड़बड़ाया।
‘‘यह सी-डी- किस कंपनी की है?’’ जी-सुंदरम ने पूछा।
‘‘जिस सी-डी में प्रोग्राम है वह बी-सी-ओ कंपनी की है जबकि दूसरी साफ्ट प्रो कंपनी की ओर से आयी है। साफ्ट प्रो कंपनी जापान की प्रसिद्ध कंपनी है। उससे ऐसा नहीं हो सकता कि बिना चेक किये वह एक खाली सीडी गृहमन्त्री की मीटिंग के लिए भेज दे। जिस मीटिंग पर उसके भारत में भविष्य के बारे में फैसला होना है।’’ इं त्यागी ने हाथ में पकड़ी सीडी को उलटते पलटते हुए कहा।

‘‘मैं इस बारे में कुछ और सोच रहा हूं। मेरा विचार है कि हम हत्या के स्रोत का सुराग पाने में सफल हो गये हैं।’’ जी-सुंदरम बोला।
‘‘यानि हत्याओं का इस सीडी से सम्बन्ध था। लेकिन इसके लिए हमें इस बात पर सहमत होना पड़ेगा कि यह खाली सीडी असली नहीं बल्कि बदल दी गयी है।’’ इं-त्यागी ने कहा।
‘‘एक संभावना तो यह हो सकती है।’’

‘‘लेकिन मेरे हाथ में आने के बाद इसके बदलने की कोई संभावना नहीं थी। क्योंकि मैंने उसे अपने अधिकार में लेने के बाद तुरंत यहाँ के इन्चार्ज को दे दिया था। जिसे उन्होंने यहाँ के लाकर में उसी वक्त रख दिया था।’’ इं त्यागी ने इन्चार्ज की ओर देखा। इन्चार्ज ने इं-त्यागी की बात के समर्थन में सर हिला दिया।
‘‘हो सकता है सीडी आपके हाथ में आने से पहले ही बदल दी गयी हो।’’ सुंदरम ने कहा।

‘‘लेकिन उस सीडी में ऐसा क्या हो सकता है कि उसे गायब कर दिया गया?’’ इं-त्यागी ने ऐसा प्रश्न किया जिसका जवाब किसी के पास नहीं था।
‘‘मेरा विचार है कि हमें साफ्ट प्रो कंपनी से सम्पर्क स्थापित करके उस प्रोग्राम के बारे में जानना चाहिए जो वे गृहमन्त्री के समक्ष रख रहे थे। उस कंपनी का मुख्यालय कहाँ है?’’
‘‘राजनगर में। और वहीं बी-सी-ओ- कंपनी का मुख्यालय भी है। मैं फोन पर उनके प्रोग्राम के बारे में पूछ लेता हूं।’’

‘‘फोन पर पूछना उचित नहीं होगा। मेरा विचार है कि उनके पास जाकर बात करना ठीक रहेगा। तुम आज ही राजनगर के लिए प्रस्थान कर दो।’’
‘‘ठीक है।’’ इं-त्यागी ने सर हिलाया।

‘‘एक बात और हो सकती है। इस सीडी पर साफ्ट प्रो कंपनी का लोगो लगा है। हो सकता है यह वही सीडी हो जो उस कंपनी ने भेजी थी।’’
‘‘किन्तु खाली सीडी?’’
‘‘यही मैं कहना चाहता हूं। यह रीराईटेबिल सीडी है। संभव है कि इसका प्रोग्राम बाद में मिटा दिया गया हो।’’ सुंदरम बोला। फिर इन्चार्ज से पूछने लगा, ‘‘क्या यह संभव है कि यह पता लग सके कि इस पर कोई प्रोग्राम पहले लिखा गया था या नहीं?’’

‘‘हाँ। यह संभव है।  कुछ साफ्टवेयर यह पता लगा सकते हैं कि इस पर पहले कोई प्रोग्राम लिखा गया था या नहीं। बल्कि कुछ दशाओं में तो हम उन प्रोग्रामों को पुन: उत्पादित कर सकते हैं जो मिटा दिये गये हों।’’
‘‘अगर ऐसा हो सकता है तो हमारा काफी सरदर्द दूर हो सकता है। आप इसके बारे में कोशिश करियेगा।’’ सुंदरम बोला।
‘‘ठीक है सर।’’ इन्चार्ज ने कहा। फिर वे लोग कम्प्यूटर रूम से बाहर आ गये।
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