Thursday, April 1, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 13


‘‘यार, तुम्हें अपने गाँव की याद नहीं आती कभी? तुमने जब से उसे छोड़ा है, कभी मुड़कर भी वहाँ नहीं गये।" राहुल ने रामदयाल को संबोधित किया। अभी वह वहीं रह रहा था। उसने किराये का मकान लेना चाहा था लेकिन रामदयाल ने मना कर दिया था।
‘‘फुर्सत ही नहीं मिली। कई बार वहाँ जाने का मन हुआ लेकिन अत्यधिक व्यवस्तता के कारण मौका नहीं निकाल पाया।’’

‘‘हाँ, यह तो मैं देख रहा हूं कि तुम अपने बिजनेस के पीछे रात को भी चैन नहीं लेते।’’ राहुल ने कहा। उसने अक्सर रात को एक बजे भी रामदयाल को फोन सुनकर बाहर जाते देखा था। जब उसने रामदयाल से इसका कारण पूछना चाहा तो रामदयाल टाल गया था।
‘‘हाँ, तुम तो देख ही रहे हो कि अक्सर मुझे अपने बिजनेस के कारण रातों को भी जागना पड़ता है।

‘‘लेकिन तुम्हारा धंधा तो अच्छी तरंह से जम गया है और यह ऐसा बिजनेस भी नहीं है जिसमें दिन रात काम करने की जरूरत पड़े।’’
‘‘बात यह है कि इस क्षेत्र में काम करने वालों को बहुत सावधानी की आवश्यकता पड़ती है। अनेक कंपनियां बाजार पर हर पल अपनी आँखें गड़ाये रखती हैं और उनके बारे में पल पल की सूचना रखनी पड़ती है। इसमें थोड़ी सी भी चूक हमें बाजार में बहुत पीछे छोड़ सकती है।
अच्छा छोड़ो इन बातों को। यह बताओ कि तुम्हारी सर्विस कैसी चल रही है?’’

‘‘बढ़िया। अधिकतर तो मुझे कंपनी का माल बाहर सप्लाई करना पड़ता है। कभी कभी मुझे आफिस का काम भी करना पड़ता है।’’
‘‘तुमने गृहमन्त्री की हत्या के बारे में सुना?’’ रामदयाल ने विषय बदलते हुए पूछा।

‘‘हाँ। इसमें किसी खोका नामक आतंकवदी संगठन का हाथ है। यह खोका आखिर है क्या? क्या चाहता है?’’
‘‘खोका संगठन क्या चाहता है, इसके बारे में तो केवल सरकार ही बता सकती है। यह इतना खतरनाक है कि पुलिस अभी तक इससे सम्बंधित एक भी व्यक्ति को पकड़ नहीं सकी है।’’

‘‘एक बात तो मैं तुमसे कहना भूल ही गया। मि0 गिरधारीलाल  ने मेरे लिए एक मकान का प्रबंध कर दिया है। वे कह रहे थे कि तुम गाँव से आये हो अत: तुम्हें आवास की आवश्यकता होगी।’’
‘‘क्या तुमने यह नहीं बताया कि तुम मेरे पास रह रहे हो?’’

‘‘बताया था। लेकिन साथ ही वह आवास लेने पर भी हामी भर ली। क्योंकि वहाँ से मेरा काम आसान होता। मि0 गिरधारीलाल ने भी यही कहा।’’
‘‘ठीक है। जैसी तुम्हारी इच्छा।’’ रामदयाल ने कहा। उसी समय फोन की घंटी बजने लगी। रामदयाल ने फोन उठाया और सुनने लगा।

‘‘मैं बाहर जा रहा हूं। एक काम आ पड़ा है।’’ रामदयाल ने रिसीवर रखते हुए कहा।
‘‘ठीक है। मैं भी अपने नये आवास में जाने की तैयारी करता हूं।’’ राहुल ने उठते हुए कहा।
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