Tuesday, March 23, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 9


सी-आई डी- की केन्द्रीय शाखा का दफ्तर बहुमंजिला था, जिसके एक कमरे में सी-आई-डी- का एक अफसर जी-सुंदरम अपने चीफ के सामने बैठा हुआ था। चीफ कह रहा था, ‘‘वैसे तो इस केस को इंस्पेक्टर त्यागी को सौंपा गया है, किन्तु गृहमन्त्री की हत्या एक महत्वपूर्ण दुर्घटना है और मैं चाहता हूं कि यह केस जल्द से जल्द हल हो जाये क्योंकि इस प्रकार की हत्या करने वाले मामूली मुजरिम नहीं हो सकते और उनका शीघ्रता से पकड़ में आना आवश्यक है। अत: मैं यह केस तुम्हें सौंप रहा हूं। तुम चाहो तो त्यागी के साथ मिलकर काम करो या अकेले इस गुत्थी को सुलझाओ।’’
‘‘अकेले काम करना ठीक रहेगा। इं-त्यागी इस केस पर पहले से काम कर रहा है अत: उसने कोई न कोई दृष्टिकोण अवश्य बनाया होगा। अगर मैं उसके साथ मिलकर कार्य करता हूं तो मेरा भी दृष्टिकोण शायद वही हो जाये जो उसका है। और हो सकता है हम असली अपराधी तक न पहुंच पायें।’’ सुंदरम ने अपनी बात स्पष्ट की।

‘‘ठीक है। तो मैं इं त्यागी से कह देता हूं कि वह तुम्हारा आवश्यकता पड़ने पर हर प्रकार से सहयोग करे, साथ ही स्वतन्त्रतापूर्वक अपना कार्य करता रहे।’’ चीफ ने कहा।
‘‘आश्चर्य है कि केन्द्रीय कमाण्डो फोर्स अब तक मौन है। जिनके ऊपर वी-आई पी- की सुरक्षा का भार रहता है।’’

‘‘हो सकता है वे लोग कुछ और सोच रहे हों। वैसे उस कांड में उस फोर्स के भी तीन सदस्य मारे गये थे जो गृहमन्त्री की सुरक्षा के लिए तैनात थे। मैंने कुछ देर पहले कमाण्डो फोर्स के चीफ से बात की थी तो उनका कहना था कि उन्हें इं-त्यागी पर पूरा विश्वास है कि वह अपराधियों तक पहुंच जायेगा। उनका यह भी विचार है कि हो सकता है, यह केवल एक दुर्घटना हो। यदि यह गुत्थी नहीं सुलझ पायी तो वे उसमें हस्तक्षेप कर सकते हैं।’’

‘‘केन्द्रीय कमाण्डो फोर्स का चीफ है कौन?’’
‘‘मि0 धीरज कौशिक इसके चीफ हैं।’’

‘‘एक इण्टेलिजेंस विभाग का चीफ इसे दुर्घटना होने की बात कर रहा है, इसपर मुझे आश्चर्य है। भला यह दुर्घटना किस प्रकार हो सकती है?’’
‘‘हो सकता है उनकी कोई अलग सोच हो। वैसे भी अभी उन्हें यह पद संभाले केवल दो वर्ष हुए हैं।’’

‘‘उससे पहले वह कहाँ कार्य करते थे?’’ सुंदरम ने पूछा।
‘‘उससे पहले वे विदेश सेवा में थे। वहाँ वे कार्य क्या करते थे यह किसी को नहीं मालूम। शायद वहाँ की सीक्रेट सर्विस में थे। क्योंकि उसमें काम करने वालों के नाम गुप्त रखे जाते हैं।’’

‘‘ओ-के- अब मैं चलता हूं। मैं इसी समय से केस पर लग जाऊंगा। केस के बारे में मुझे पूरी जानकारी तो इं-त्यागी से मिलेगी।’’ सुंदरम ने प्रश्नात्मक दृष्टि से चीफ की ओर देखा।
‘‘हाँ। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट इत्यादि उन्हीं के पास आयेगी। तुम उनसे मिल लेना। मैं फोन कर देता हूं कि तुम्हारा हर प्रकार से सहयोग करें।’’

‘‘सुंदरम ने चीफ से हाथ मिलाया और बाहर निकल आया। कुछ देर बाद उसकी कार उस पुलिस स्टेशन की ओर जा रही थी जिसमें इं-त्यागी की नियुक्ति थी।’’
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