Monday, March 15, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 6


सिंगली के सामने इस समय ओवर कोट पहने हुए और काला चश्मा लगाये एक व्यक्ति बैठा हुआ था। उन दोनों के मस्तकों पर पड़ी लकीरें बता रही थीं कि दोनों के बीच कोई तनावपूर्ण बातचीत हो रही है।
‘‘क्या तुमने गिरधारीलाल एण्ड कम्पनी की ओर से आये हुए साफ्टवेयर अच्छी तरंह चेक कर लिये हैं? क्योंकि उसी पर हमारी कल की सफलता निर्भर करती है।’’ उस व्यक्ति ने पूछा।

‘‘आप निश्चिन्त रहिए सर। कल की मीटिंग पूरी तरंह सफल होगी।’’ सिंगली ने कहा।
‘‘उस मीटिंग में सीडी देकर किसको भेज रहे हो?’’
‘‘मनोज वर्मा को सर। मेरा विचार है कि वही उस मीटिंग के लिये सर्वोत्तम होगा।"

‘‘ठीक है।  मुझे कुछ देर पहली स्थानीय सहयोगी कंपनी के डायरेक्टर का फोन मिला था। उसके अनुसार हमारी विरोधी कंपनी बी-सी-ओ- अपनी ओर से सुधीर कुमार को उस मीटिंग में भेज रही है।’’
‘‘ठीक है यह उनकी मर्जी है, चाहे जिसको भेजें। सर एक बात कई दिनों से मेरे मस्तिष्क में चकरा रही है। आप से वह बात पूछनी थी।’’ सिंगली बोला।
‘‘पूछो क्या पूछना है?’’

‘‘मुझे आज तक पता नहीं चल पाया कि हमारी स्थानीय सहयोगी कंपनी कौन सी है?’’
‘‘सच्ची बात तो यह है कि इसका पता मुझे भी नहीं है। यह केवल हमारी कंपनी के उच्चतम प्रबंधकों को पता है। बात यह है कि स्थानीय कंपनी अभी इस बात को राज़ में रखना चाहती है। जब हमारे कदम भारत में जम जायेंगे तब वह कंपनी खुले तौर पर हमारा समर्थन करेगी। अच्छा अब मैं चलता हूं। तुम अपनी तैयारियां पूरी करो।
‘‘हमारी तैयारियां पूरी हैं सर।’’
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दिल्ली के एक पाँच सितारा होटल के कमरे में उस मीटिंग की शुरुआत हो चुकी थी जिसपर विश्व की दो बड़ी कम्प्यूटर कंपनियों की आँख लगी थी। इस कमरे में बीचोंबीच लगी गोल मेज़ के चारों ओर कुर्सियां लगी थीं। जिसपर गृहमन्त्री, सुधीर कुमार तथा मनोज वर्मा के अलावा कुछ अन्य लोग भी बैठे थे। ये सभी लोग इस मीटिंग के विषय से किसी न किसी रूप में सम्बंधित थे। इसमें कुछ तो कम्प्यूटर विशेषग्य थे, कुछ गृहमन्त्री के स्टाफ से सम्बंधित सचिव इत्यादि थे।

‘‘आप लोग यह बताईए कि नमूने के तौर पर आप जो सी-डी- लाये हैं उसमें क्या विशेषताएं हैं और उसमें रिकार्ड प्रोग्राम किस क्षेत्र से सम्बंधित हैं? पहले मि0 सुधीर कुमार आप बताईए।’’ गृहमन्त्री ने दोनों को संबोधित किया।

सुधीर कुमार ने बताना शुरू किया, ‘‘सर मेरे प्रोग्राम की यह विशेषता है कि इसके द्वारा किसी भी संदिघ्द व्यक्ति के बारे में पूरी छानबीन करके उसकी सात पुश्तों का रिकार्ड खंगाला जा सकता है। और यह पकड़ में आ सकता है कि कहीं वह व्यक्ति आतंकवादी तो नहीं। और अगर आतंकवादी है तो उसके लिंक कहां कहां जुड़े हुए हैं।’’
‘‘बहुत खूब लेकिन यह काम कैसे करता है?’’

‘‘इस साफ्टवेयर में जो भी संदिग्ध् व्यक्ति होता है उसके बारे में थोड़ी सी जानकारी जैसे कि उसका ई मेल या फेसबुक जैसी किसी सोशल वेबसाइट पर उसका एकाउंट बताना होता है। बाकी का काम हमारा साफ्टवेयर करता है और ईमेल वगैरा से होता हुआ उसका पूरा रिकार्ड इंटरनेट पर खंगाल डालता है और उससे जुड़े संदिग्ध् व्यक्तियों की पूरी लिस्ट बना डालता है। और फिर अपने आप उनका विश्लेषण करके रिपोर्ट पेश कर देता है।’’
‘‘आपका प्रोग्राम काफी अच्छा है मि0 सुधीर कुमार। और हम इससे काफी प्रभावित हुए हैं। अब मि0 मनोज वर्मा आप बताईए कि आपका प्रोग्राम क्या है? गृहमन्त्री ने पूछा।

मनोज वर्मा कुछ पलों के लिए मौन रहा। उसके चेहरे पर विस्मय की झलक थी। फिर बोला, ‘‘आश्चर्य की बात है कि जो प्रोग्राम मि0 सुधीर कुमार ने बताया, ठीक वही प्रोग्राम हमारी कंपनी साफ्ट प्रो का भी है। जो विशेषताएं  इन्होंने अपने प्रोग्राम की बतायी हैं ठीक वही विशेषताएं हमारे प्रोग्राम की भी हैं।’’
‘‘कमाल है? यह कैसे हो सकता है?’’ गृहमन्त्री ने आश्चर्य से कहा।
‘‘यही तो मेरी भी समझ में नहीं आ रहा है।’’ मनोज वर्मा बोला।

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