Tuesday, March 30, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 12


अगले दिन एक नया हंगामा शुरू हो गया। ‘खोका’ नामक एक आतंकवादी संगठन ने गृहमन्त्री की हत्या की जिम्मेदारी अपने ऊपर ले ली। उसने घोषित किया कि गृहमन्त्री तथा आठ अन्य लोगों की हत्या उसी ने की है।
खोका एक खतरनाक आतंकवादी संगठन था। इससे पहले भी उसने दो महत्वपूर्ण लोगों की हत्या के लिए अपने को जिम्मेदार घोषित किया था। इंटेलिजेंस विभाग के अनेक मस्तिष्क इसके पीछे लगे थे, लेकिन यह इतना मज़बूत संगठन था कि इसके बारे में उन्हे कोई विशेष जानकारी नहीं मिल पायी थी। किसी को नहीं मालूम था कि इस संगठन का चीफ कौन है तथा इसका मुख्यालय कहां है। इसकी गतिविधियाँ पूरे देश में फैली थीं। इनका प्रमुख कार्य था महत्वपूर्ण लोगों की हत्या करना। ये लोग सरकार की कुछ पालीसियों में बदलाव चाहते थे जिन्हें सरकार ने मानने से इंकार कर दिया और बदले में खोका संगठन ने अपनी कार्यवाई आरम्भ कर दी।

हत्याएं करने के इनके ढंग भी विशेष प्रकार के होते थे। सबसे पहले रक्षा राज्यमन्त्री की हत्या इनके द्वारा हुई थी। भोजन करते समय अचानक उनका सर एक हल्के विस्फोट द्वारा कई टुकड़ों में बंट गया था। बाद में पता चला कि उनके भोजन में एक छोटा बम छुपा हुआ है। इस हत्या की जिम्मेदारी खोका ने अपने सर ले ली थी।
उसके बाद दूसरी हत्या रिटायर्ड जनरल डी-एस-माथूर की हुई थी। एक इमारत की लिफ्ट, जिसमें वे मौजूद थे चलते चलते अचानक जाम हो गयी। उसका दरवाजा भी पूरी तरंह जाम हो गया था। फिर उस लिफ्ट में कार्बन मोनोआक्साइड प्रवाहित कर दी गयी और इस प्रकार उनकी मृत्यु हो गयी।

इस प्रकार गृहमन्त्री की हत्या खोका संगठन द्वारा की गयी तीसरी महत्वपूर्ण हत्या थी। और यह हत्या भी पिछली दो हत्याओं की तरंह अनोखी थी। जिसमें पुलिस अभी तक हत्या का ढंग भी नहीं समझ पायी थी।
समाचार पत्रों और टीवी चैनलों ने उस दिन पुलिस की जमकर खिंचाई की और इसे पुलिस की सुस्ती कहा कि वह अब तक इस संगठन के एक भी व्यक्ति की परछाईं तक नहीं पा सकी है।

‘‘तो इन हत्याओं में खोका का हाथ है।’’ जी- सुंदरम ने सिगरेट का कश लेकर कहा। अभी अभी वह इं-त्यागी से मिलने वहां आया था।
‘‘हाँ। यह संगठन हमारे लिए सिरदर्द बन गया है। एक ओर तो मीडिया वाले टाँग खींच रहे हैं तो दूसरी ओर ऊपर वाले दबाव डाल रहे हैं कि जल्द से जल्द कोई सुराग खोजो। यहाँ हालत ये है कि अभी तक कोई सिरा ही नहीं मिला।’’ इं-त्यागी के चेहरे पर चिन्ता स्पष्ट दिखाई दे रही थी।
‘‘क्या कम्प्यूटर में कोई गड़बड़ नहीं दिखाई दी?’’

‘‘कम्प्यूटर अच्छी तरंह चेक कर लिया गया है और उसमें ऐसा कोई फालतू सर्किट जुड़ा हुआ नहीं मिला जिसपर प्रघाती तरंगों के रिसीवर का संदेह किया जा सकता था। यही नही, बल्कि हमने कमरे की हर वस्तु चेक कर ली लेकिन कहीं कुछ नहीं मिला।’’
‘‘फिर हमें नये कोण से विचार करना होगा। मैं यह सोच रहा हूं कि गृहमन्त्री की हत्या उसी समय क्यों हुई जब वे उन कंपनियों के प्रोग्राम देख रहे थे। क्या उन प्रोग्रामों में कोई ऐसी बात थी जो उस संगठन के हितों के प्रतिकूल थी?’’ जी-सुंदरम ने आगे झुकते हुए कहा।

‘‘यह प्वाइंट सोचने योग्य है। मेरा विचार है कि हमें उन प्रोग्रामों को देख लेना चाहिए, जो उन कंपनियों ने भेजे थे।’’ इं-त्यागी ने कहा। फिर वे दोनों कम्प्यूटर रूम में जाने के लिए उठ खड़े हुए।
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