Sunday, March 28, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 11


‘‘अगर आप कोई आवाज़ सुन रहे हों तो यह जरूरी नहीं कि उस आवाज को पैदा करने वाला आपके आसपास हो। हो सकता है वह मीलों दूर बैठा किसी मोबाइल या ट्रान्स्मीटर द्वारा अपनी आवाज आप तक पहुंचा रहा हो।’’
‘‘आप कहना क्या चाहते हैं मि0 सुंदरम?’’

‘‘मैं यह कहना चाहता हूं कि जब रिमोट द्वारा संचालित बम बनाये जा सकते हैं जिन्हें मीलों दूर से चलाया जा सकता है तो कोई ऐसी विधि भी विकसित की जा सकती है, जिसके द्वारा दूर ही से किसी व्यक्ति की रगों को आघात पहुंचाया जा सकता है।’’
‘‘लेकिन रिमोट बमों में एक रिसीवर होता है जो विस्फोट कराने वाले संदेशों को रिसीव करके बम का विस्फोट कर सकता है। मनुष्य के मस्तिष्क में इस प्रकार का रिसीवर कैसे हो सकता है?’’ इं-त्यागी ने पूछा।

‘‘मनुष्य के मस्तिष्क में न सही, उसके आसपास तो हो सकता है। शायद उनके आसपास कोई ऐसी वस्तु रही हो जो उन आघाती तरंगों का रिसीवर रही हो। जो उन व्यक्तियों के ब्रेन हैमरेज का कारण बनी हो।’’
‘‘अर्थात हम लोग यह थ्योरी मान लें कि उन व्यक्तियों की हत्या में प्रघाती तरंगों ने काम किया है।’’

‘‘फिलहाल तो यही मानना पड़ेगा। क्योंकि दुर्घटना का कोई प्रश्न नहीं उठता, और कोई विकल्प दिखाई नहीं पड़ता। और ये प्रघाती तरंगें भी विशेष प्रकार की माननी पड़ेंगी क्योंकि साधारण तरंगों में यह शक्ति नहीं होती कि उनके प्रभाव से मस्तिष्क की रगें फट जायें।’’ जी-सुंदरम ने सिगरेट सुलगाकर एक कश लिया और कुर्सी से टेक लगाकर कुछ सोचने लगा। इं-त्यागी और सब इं-मोहित भी अपने स्थान पर मौन होकर नये दृष्टिकोण पर विचार करने लगे थे।

‘‘तो अब हम इस थ्योरी को सही मानते हुए नये सिरे से इस केस पर विचार करते हैं।’’ कुछ देर बाद इं- त्यागी ने मौन तोड़ते हुए कहा।
‘‘अगर यह बात सही है तो हमें सबसे पहले उन तरंगों के रिसीवर की खोज करनी होगी जो उस कमरे की कोई वस्तु होनी चाहिए।’’
‘‘उस कमरे में क्या क्या सामान था?’’ सुंदरम ने पूछा।
‘‘मेज, कुर्सियों के अलावा एक कम्प्यूटर। जिन व्यक्तियों की मृत्यु हुई, उनके पास कोई विशेष सामान नहीं था।’’

‘‘मेरे विचार से रिसीवर होने की अधिक सम्भावना कम्प्यूटर में ही है। क्योंकि वह जटिल सर्किटों से बना होता है और उसमें इलेक्ट्रानिक उपकरण के फिट करने की संभावना बहुत ज्यादा है।’’
‘‘तो फिर ठीक है। उस कम्प्यूटर को लैबोरेट्री में भेज देते हैं। ताकि पता लग सके कि उसमें कोई फालतू सर्किट तो नहीं है।’’ इं त्यागी ने कहा।
‘‘हाँ । यह काम जल्दी होना चाहिए। और साथ ही मेज कुर्सियों की भी चेकिंग करवा लीजिए।’’
‘‘ठीक है। मैं अभी प्रबंध करवाता हूं।’’ इं त्यागी ने उठते हुए कहा। फिर वे सभी उठ गये।
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