Friday, March 26, 2010

मौत की तरंगें : एपिसोड - 10


क्या पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ गयी सर?’’ सब इं- मोहित कुमार ने इं- त्यागी से पूछा।
‘‘हाँ! रिपोर्ट के अनुसार उन सभी की मृत्यु मस्तिष्क की रगों के फटने से हुई है। लेकिन ऐसी क्या बात हुई कि उन सभी के मस्तिष्क की रगें एक साथ फट गयीं?’’

‘‘यही तो पहेली है। अगर यह हल हो जाये तो तभी पता चल सकेगा कि यह सामूहिक हत्या की वारदात है या कोई रहस्यमय दुर्घटना।’’
‘‘या फिर हो सकता है कि यह कोई नयी बीमारी हो जो एक साथ कई लोगों पर आक्रमण करती है और उसकी चपेट में आने वाला तुरन्त मौत की गर्त में समा जाता हो।’’

‘‘उस कमरे की तलाशी में भी कुछ नहीं निकला। इस केस में तो कोई सूत्र ही हाथ नहीं आ रहा है।’’ इं- त्यागी अपनी टोपी उतारकर सर सहलाने लगा। तभी वहां रखे फोन की घंटी बजने लगी। उसने फोन उठाया।
‘‘हैलो, इं त्यागी स्पीकिंग--यस सर---ओ के सर।’’ उसने रिसीवर क्रेडिल पर रख दिया।
‘‘किसका फोन था सर?’’

‘‘सी-आई-डी- के चीफ का। वे हमारे सहयोग के लिए एक डिटेक्टिव को भेज रहे हैं।’’
‘‘क्या उन कंपनियों को मालूम हो चुका है कि उनके भेजे गये प्रतिनिधि गृहमन्त्री के साथ ही मारे गये हैं’’
‘‘अवश्य । यह बातें तो सारे समाचार पत्रों में आ चुकी हैं। फिर उन कंपनियों को कैसे नहीं मालूम होंगी।’’

‘‘उन कंपनियों ने इसपर कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की?’’
‘‘उन्होंने सरकार को गृहमन्त्री की मृत्यु पर शोक सन्देश भेजा था और साथ ही आशा प्रकट की थी कि नये गृहमन्त्री उनके प्रोग्रामों में अवश्य रुचि लेंगे।’’
‘‘उन्होंने अपने प्रतिनिधियों के बारे में कुछ नहीं कहा?’’
‘‘पहले तो कुछ नहीं कहा। बाद में जब मैंने उनके बारे में बात छेड़ी तो उन्होंने दु:ख प्रकट किया।’’

तभी वहाँ सी-आई-डी- इंस्पेक्टर जी-सुंदरम प्रविष्ट हुआ।
‘‘मैं जी-सुंदरम हूं।’’ उसने इं-त्यागी से हाथ मिलाते हुए कहा, ‘‘मेरे बारे में आपको सी-आई-डी- चीफ ने बता दिया होगा।’’
‘‘जी हाँ। अभी अभी उनका फोन आया था कि आप ही इस केस की तफ्तीश करेंगे।’’
‘‘नहीं, केस की तफ्तीश तो आप ही करेंगे। मैं तो केवल आपको सहयोग दूंगा। -- क्या पोस्टमार्टम की रिपोर्ट आ गयी?’’

‘‘जी हाँ, ये देखिए।’’ कहते हुए इं- त्यागी ने पोस्टमार्टम की रिपोर्ट जी-सुंदरम के सामने रख दी।
‘‘इस रिपोर्ट के अनुसार उनके मस्तिष्क की रगें इस प्रकार फट गयीं मानो उनपर कोई भयंकर आघात हुआ हो। लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा है कि उनपर किस प्रकार का आघात हुआ है। अगर ऐसा होता तो उनके शरीर पर चोट के निशान अवश्य पाये जाते।’’

‘‘तो क्या यह जरूरी है कि किसी हथियार द्वारा चोट पहुंचाकर उनकी हत्या की गयी हो?’’ सुंदरम ने कहा।
‘‘फिर और क्या प्रणाली हो सकती है?’’............

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